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छत्तीसगढ़ में बढ़ गया दूध का उत्पादन, 400 टन का इजाफा

आज विश्व दुग्ध दिवस,पिछले पांच साल

में करीब 400 टन दूध का उत्पादन बढ़ा

रायपुर। प्रदेश के लिए एक सुखद खबर है। पिछले चार सालों में दूध का उत्पादन बढ़ गया है। इतना ही नहीं, दुधारू गाय-भैंस की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। गोठान योजना और कृत्रिम गर्भाधान के कारण ये संभव हुआ है।

हर साल 6 लाख से अधिक गाय-भैंस का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है। इससे गाय और भैंस की तादाद लगभग 2.50 लाख बढ़ रही है। यही कारण है कि सिर्फ रायपुर के किसान ही रोजाना 80 लाख रुपए का दूध बेचने में सक्षम हो सके हैं। ये आंकड़े पशुपालन विभाग के हैं।

शासन भी दे रहा प्रोत्साहन

दूध उत्पादन को बढ़ावा के लिए किसानों को लोन और सब्सिडी दी जारी रही है। इसका लाभ अलग-अलग कैटेगरी में मिलता है। इसके अलावा 2020-21 में प्रदेश में अलग-अलग हिस्सों में 527 दूध यूनिट स्थापित किए गए हैं।

रायपुर जिले में 512 से अधिक दूध डेयरी

रायपुर जिले में 512 से अधिक दूध डेयरी है। हर रोज 150 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। यहां दुधारू गाय-भैंस 2021 में 8 हजार थीं। अब 2022 में इनकी संख्या 10 हजार हो गई हैं। वहीं किसान और गोशाला संचालकों को हर रोज दूध से 75 से 80 लाख रुपये की आमदनी हो रही है।

देवभोग समेत अन्य कंपनी भी खरीद रहे किसानों से दूध

प्रदेश के किसानों से देवभोग जैसे बड़ी कंपनी किसानों से दूध खरीद रही है। अकेले देवभोग हर रोज किसानों से 85 से 90 हजार लीटर दूध खरीदती है। इसके अलावा वचन, अमूल और गाया जैसे कई कंपनियां भी 30 से 40 हजार लीटर किसानों से दूध खरीदती हैं।

यह है वजह, बताया संचालक ने

पशुपालन विभाग के संचालक डॉ. शंकर लाल उईके ने बताया कि हर साल प्रदेश में पशुओं का टीकाकरण और गर्भाधान कराया जा रहा है। इसके अलावा गौठानों में अब नियमित रूप से पशुओं का उपचार होता है। इसी वजह से दूध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले साल में उत्पादन और भी अधिक बढ़ने का अनुमान है।