रायपुर: शारदा चौक-तात्यापारा सड़क चौड़ीकरण मुद्दे को लेकर व्यापारियों और आम लोगों से बातचीत की तो उनका कहना था कि 600 मीटर तक सड़क चौड़ीकरण हो जाए तो राजधानी में रोजाना करीब चार से पांच लाख लोगों को यातायात जाम की समस्या से राहत मिलेगी। वर्तमान में तात्यापारा के 300 मीटर बाद सड़क संकरी होने की वजह से यहां बाटल नेक बन जाता है, जिसके कारण दिन भर हजारों लोगों को रोज जाम में फंसना पड़ता है। सड़क चौड़ी करने के लिए 30 करोड़ का मुआवजा चार साल पहले रखा गया था। अभी इस बजट में यह संभव नहीं है। दरअसल व्यापारी भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक ही मुआवजा देने की मांग कर रहे हंै। ऐसे में बजट से कहीं ज्यादा मुआवजा देना पड़ सकता है। वहीं निगम के अधिकारियों का कहना है कि पुराने सर्वे के अनुसार सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले करीब 20 व्यापारियों, मकान मालिकों को दस करोड़ रुपये मुआवजा देना है। सर्वे का अवलोकन कर मुआवजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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शारदा चौक-तात्यापारा रोड के चौड़ीकरण की उम्मीद अब बंध गई है। यह रोड राजधानी के व्यस्ततम स्थल जयस्तंभ से जुड़ी हुई है। सरकार से नगर निगम को 30 करोड़ रुपये का बजट मिलते ही चौ?ीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। पिछले 15 साल से इस रोड के चौड़ीकरण का काम अटका हुआ है। इसे लेकर पिछली भाजपा सरकार में करीब आधा दर्जन बार प्रस्ताव भेजा गया था। निगम स्तर पर भी सड़क चौड़ीकरण के लिए शासन से पैसे की मांग की गई थी पर न पैसा मिला और न ही योजना एक कदम भी आगे बढ़ सकी, लेकिन पिछले महीने नगर निगम के बजट में इसे शामिल कर 30 करोड़ का प्रविधान करने के बाद शहरवासियों को उम्मीद है कि एक-दो महीने के भीतर सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू हो जाएगा।
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दोनों ओर 20-20 फीट चौड़ा
निगम के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में सड़क की चौड़ाई कहीं 30, 35, 40, 45 और 50 फीट है। दोनों ओर कम से कम 20-20 फीट इसकी चौड़ाई बढ़ानी है।
तीन महापौर बदले पर अटका रहा चौड़ीकरण
शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले जीई रोड स्थित शारदा-चौक से आमापारा तक रोड चौड़ीकरण का प्रस्ताव साल 2006-07 में तैयार हुआ था। महापौर सुनील सोनी के कार्यकाल के अंतिम दिनों में आमापारा से तात्यापारा तक पहले चरण का चौड़ीकरण किया भी गया। आगे का काम मुआवजे को लेकर अटका रहा। इसके बाद महापौर डा. किरणमयी नायक और प्रमोद दुबे महापौर बने। दोनों ने अपने कार्यकाल में चार से पांच बार शासन को प्रस्ताव भेजा। यही नहीं, राज्य सरकार के अनुपूरक बजट में फंड मिलने की उम्मीद जताई थी पर यह नहीं हुआ।










