महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के जंगलों में इन दिनों सागौन तस्करों के हौसले बुलंद हैं. आलम यह है कि पिथौरा वन परिक्षेत्र के जम्हर जंगल में तस्करों ने जमकर तांडव मचाया और एक-दो नहीं, बल्कि 60 से अधिक कीमती सागौन के पेड़ों को काटकर ले गए. मामले में DFO ने फील्ड पर तैनात फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है और सघन जांच के लिए टीम गठित कर दिया है.
लापरवाही या मिलीभगत? लाखों की लकड़ी पार
बता दें कि सागौन की लकड़ी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों की कीमत रखती है. इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का कटना और जिम्मेदारों को भनक तक न लगना, विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर पर्दे के पीछे लकड़ी माफिया और विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत है? अब तक विभाग यह पता नहीं लगा पाया है कि लकड़ी काटकर कहां खपाई गई है.
वन विभाग पर उठे सवाल
मामला गर्म होने के बाद महासमुंद वन मंडल अधिकारी (DFO) मयंक पांडे ने अवैध कटाई की पुष्टि की है. उन्होंने सघन जांच और छापेमारी की बात कहते हुए फील्ड में तैनात फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल एक फॉरेस्ट गार्ड ही इसके लिए जिम्मेदार है?
सिस्टम की नाकामी पर बड़े सवाल:
जब इतनी बड़ी कटाई हो रही थी, तब डिप्टी रेंजर और रेंजर स्तर के अधिकारी कहां थे?
क्या इलाके में नियमित गश्त और मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित है?
क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े अफसरों को बचाने की कोशिश की जा रही है?
जांच का आश्वासन
DFO मयंक पांडे ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और इलाके में रेड डाली जा रही है. हालांकि, जंगल की उजड़ी हुई तस्वीरें चीख-चीख कर सिस्टम की नाकामी बयां कर रही हैं. अगर समय रहते निगरानी होती, तो शायद इन बेशकीमती पेड़ों को माफिया की कुल्हाड़ी से बचाया जा सकता था.










