महासमुंद। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली महिला सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (मितानिन) के लिए बनाए गए मितानिन शेल्टर का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है. निर्माण एजेंसी की लापरवाही, गुणवत्ताविहीन निर्माण और कार्य अवधि समाप्त होने के लगभग दो साल बाद भी भवन का हैंडओवर नहीं होने से मितानिनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पताल परिसर में 10 लाख रुपये की लागत से मितानिन शेल्टर भवन के निर्माण के लिए वर्ष 2023-24 में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) को निर्माण एजेंसी बनाया गया था. मई 2024 में भवन का निर्माण लगभग पूरा हो गया, लेकिन अब तक अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर नहीं किया गया. हैरानी की बात यह है कि बिना हैंडओवर के ही इस भवन को स्टोर रूम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.
दूरदराज से मरीजों को लेकर जिला अस्पताल आने वाली मितानिनों का कहना है कि भवन बने एक-दो साल हो गए, लेकिन उन्हें ठहरने और आराम की सुविधा नहीं मिली. मरीजों के साथ आने पर रुकने और सोने में काफी दिक्कत होती है.
मितानिन सम्मेलन के दौरान मितानिनों ने इस मुद्दे की शिकायत महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा से की. विधायक के हस्तक्षेप के बाद आनन-फानन में शेल्टर को मितानिनों को सौंपने की कवायद शुरू हुई. विधायक ने बताया कि भवन में दरवाजे और नल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इसे स्टोर रूम के रूप में इस्तेमाल कर रहा था. उन्होंने तत्काल भवन खाली कराने के निर्देश दिए हैं.
वहीं, मेडिकल कॉलेज के अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत माहेश्वरी का कहना है कि उन्हें अब तक भवन का हैंडओवर नहीं मिला है. जांच के दौरान नल और वॉश बेसिन नहीं लगे होने की कमी पाई गई थी, जिसे पूरा करने के निर्देश दिए गए थे. काम पूर्ण होने पर ही हैंडओवर लिया जाएगा.
सीजीएमएससी के उप अभियंता लेखराज ठाकुर ने दावा किया है कि शेष कमियां एक सप्ताह में दूर कर भवन का हैंडओवर कर दिया जाएगा.
गौरतलब है कि बिना हैंडओवर के ही उपयोग में लाए जाने से मितानिन शेल्टर की टाइल्स तक टूट चुकी हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि दो साल से तैयार भवन का हैंडओवर न होना और उसे स्टोर रूम बना देना किसकी जिम्मेदारी है. अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है.











