खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले की खैरागढ़ नगर पालिका इन दिनों गंभीर अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। आंकड़ों पर नजर डालें तो ऐसा लगता है मानो शहर के हर गली-मोहल्ले में शहनाई गूंज रही थी, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। महज साढ़े तीन महीने में 2744 विवाह प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए, वह भी उस दौरान जब जिम्मेदार अधिकारी खुद निलंबित थे।
नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ कोमल ठाकुर को 14 नवंबर 2025 को अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया था। इसके बाद नवंबर के अंत से लेकर फरवरी तक, यानी करीब साढ़े तीन महीने में रिकॉर्ड संख्या में प्रमाणपत्र जारी हो गए। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी पद पर ही नहीं थे, तो उनकी आईडी से विवाह प्रमाणपत्र कैसे जारी हो रहे थे।
वहीं, शहर की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक इन तीन महीनों में मुश्किल से 50-60 शादियां ही हुई होंगी। यानी कागजों में जितनी शादियां दिख रही हैं, उतनी बारातें अगर वास्तव में निकलतीं तो शहर का ट्रैफिक ही ठप पड़ जाता। इससे साफ है कि मामला सिर्फ गड़बड़ी नहीं, बल्कि बड़े स्तर के घोटाले की ओर इशारा करता है। मामला केवल खैरागढ़ तक सीमित नहीं रहा। जानकारी के अनुसार जांजगीर-चांपा, धमतरी और बीजापुर जैसे दूर-दराज जिलों के लोगों को भी यहां से विवाह प्रमाणपत्र जारी किए गए, जबकि नियमों के तहत यह संभव नहीं है।
बता दें कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन सिस्टम पर आधारित है, जिसमें लोक सेवा केंद्र से आवेदन, दस्तावेजों की जांच और सीएमओ की मंजूरी के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। लेकिन इस मामले में निलंबित कर्मचारियों की आईडी से ही वेरिफिकेशन और सीएमओ के डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग कर प्रमाणपत्र जारी किए जाते रहे।
सूत्रों के मुताबिक इस “तेज रफ्तार शादी सेवा” के नाम पर मोटी रकम की वसूली भी की गई। मामला सामने आने के बाद जिम्मेदारों के बयान भी सवाल खड़े कर रहे हैं, कोई खुद को निलंबित बताकर अनभिज्ञता जता रहा है, तो कोई अपनी आईडी के दुरुपयोग की बात कह रहा है। फिलहाल नए सीएमओ ने विवाह प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है और जांच की बात कही जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा या फिर इस कथित “शादी उद्योग” के असली जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचेगी।










