जगदलपुर। करीब 5 दशकों से नक्सलवाद का अभिशाप झेल रहा बस्तर अब बदलाव की दहलीज पर खड़ा है. बंदूक की बजाए अब संविधान की आवाज सुनाई दे रही है, और इसी बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर बनकर सामने आया है पापा राव का सरेंडर.
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के अहम सदस्य पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ प्रदेश के डीजीपी, एडीजी नक्सल, बस्तर आईजी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. यह सिर्फ सरेंडर नहीं था बल्कि एक विचारधारा से मुख्यधारा की ओर वापसी का प्रतीक था. इस दौरान आदिवासी समाज के प्रमुखों ने संविधान की किताब और फूल देकर सभी सरेंडर नक्सलियों का स्वागत किया, मानो बस्तर अब बंदूक नहीं, संविधान के रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प ले चुका हो.
सरेंडर के साथ भारी मात्रा में हथियार भी पुलिस के हवाले किए गए 8 AK-47, 1 इंसास, 4 थ्री-नॉट-थ्री, 1 एसएलआर, 2 सिंगल शॉट और बीजीएल लॉन्चर साथ ही 12 लाख रुपए की नगद राशि भी सुपुर्द की गई.
गृहमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में अब 96 प्रतिशत नक्सलवाद खत्म हो चुका है. पिछले 2 वर्षों में करीब 3000 नक्सलियों का पुनर्वास, 2000 से ज्यादा गिरफ्तारियां और 500 से अधिक नक्सली मारे गए यानि कुल मिलाकर 5000 से ज्यादा नक्सलियों की ताकत को कमजोर किया जा चुका है.
बस्तर संभाग, कवर्धा, मानपुर-मोहला और धमतरी जैसे कभी नक्सल प्रभावित इलाके अब तेजी से नक्सल मुक्त हो रहे हैं. सरकार का लक्ष्य साफ है 31 मार्च तक बचे हुए 4 से 5 प्रतिशत नक्सलवाद का भी पूरी तरह सफाया.
एक बड़ी चुनौती अब भी है बाकी
जंगलों और सड़कों के किनारे बिछे आईईडी और बारूदी सुरंगें अब भी जवानों के लिए खतरा बनी हुई हैं, लगातार इन्हें बरामद किया जा रहा है. गृहमंत्री ने साफ कहा है कि जिस तरह गांव-गांव को ओडीएफ घोषित किया गया, उसी तरह अब हर गांव को ‘आईईडी फ्री’ बनाया जाएगा. 5 दशकों का दर्द अब खत्म होने की कगार पर है. पापा राव का सरेंडर एक संकेत है कि बस्तर बदल रहा है. जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब विकास और विश्वास की आवाज सुनाई दे रही है, और यही बस्तर की नई पहचान बनने जा रही है.









