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केंद्रीय जेल में 10 दिन में तीसरी मौत…सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित केंद्रीय जेल एक बार फिर चर्चा में है। महज 10 दिनों के भीतर तीन बंदियों की मौत के मामलों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं से जेल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

10 दिन में तीन मौतों से बढ़ी चिंता

केंद्रीय जेल में हाल के दिनों में तीन अलग-अलग मौतों की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें एक महिला बंदी, एक विचाराधीन कैदी और एक सजायाफ्ता बंदी शामिल हैं।31 मई 2026 को एक महिला बंदी की आत्महत्या का मामला सामने आया था। इसके बाद 4 जून 2026 को नक्सल प्रकरण में बंद विचाराधीन कैदी रमेश कुंजाम की बाथरूम में गिरने के बाद मौत हो गई। वहीं अब 7 जून 2026 को सजायाफ्ता बंदी सुधु कश्यप की उपचार के दौरान मौत होने से जेल प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।

तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था सुधु कश्यप

जानकारी के अनुसार सुधु कश्यप को अक्टूबर 2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) के तहत सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। 6 जून को उसकी अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में भर्ती कराया गया।अस्पताल में उपचार के दौरान 7 जून को उसकी मौत हो गई। फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों को लेकर जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया जारी है।

रमेश कुंजाम की मौत भी बनी थी चर्चा का विषय

इससे पहले 4 जून को विचाराधीन कैदी रमेश कुंजाम की मौत ने भी कई सवाल खड़े किए थे। जानकारी के मुताबिक वह बाथरूम में गिर गया था, जिसके बाद उसकी जान चली गई। घटना के बाद जेल के भीतर सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।

महिला बंदी की आत्महत्या ने भी बढ़ाई थी चिंता

31 मई को एक महिला बंदी द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना ने जेल के भीतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, निगरानी और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

जेल प्रबंधन की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

लगातार तीन मौतों की घटनाओं के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जेल में बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण, निगरानी और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और संवेदनशील कैदियों की निगरानी जैसे मुद्दे अब चर्चा के केंद्र में हैं।

जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

तीनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन लगातार हो रही मौतों ने जेल प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इन घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।