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धान खरीदी से पहले सरकार ने बदले नियम, किसानों और राइस मिलर्स पर दिखेगा सीधा असर

 छत्तीसगढ़ :  आगामी धान खरीदी सीजन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने अहम फैसले लिए हैं। बुधवार को हुई मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी और मिलिंग व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।

ब्रोकन चावल की सीमा में किया गया बड़ा बदलाव

सरकार ने तय किया है कि अब सेंट्रल पूल में 25 प्रतिशत ब्रोकन चावल स्वीकार नहीं किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत केवल 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल ही लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से धान के बेहतर उपयोग के साथ खरीदी और वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।

नीलामी की जरूरत भी होगी कम

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पहले सेंट्रल पूल और राज्य पूल में निर्धारित मात्रा देने के बाद काफी धान बच जाता था, जिसे सरकार को नीलाम करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अतिरिक्त धान बचने की संभावना काफी कम हो जाएगी, जिससे नीलामी की आवश्यकता भी लगभग समाप्त हो सकती है।

बारदाने की कमी नहीं आने देने के निर्देश

बैठक में यह भी तय किया गया कि धान खरीदी के दौरान किसी भी समिति या केंद्र में बारदाने की कमी नहीं होने दी जाएगी। संबंधित अधिकारियों को समय रहते पर्याप्त बारदाने उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

खरीदी और मिलिंग व्यवस्था होगी अधिक आसान

सरकार ने धान खरीदी और मिलिंग प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल, सुगम और प्रभावी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा की। बैठक में पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई, जिससे खरीदी से लेकर चावल तैयार होने तक की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं कम की जा सकें।

इन मंत्रियों ने लिया बैठक में हिस्सा

मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा, रामविचार नेताम और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल शामिल रहे। सभी ने धान खरीदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

देश में सबसे ज्यादा समर्थन मूल्य का लाभ

छत्तीसगढ़ उन राज्यों में शामिल है जहां किसानों से देश में सबसे अधिक मूल्य पर धान खरीदा जाता है। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी करती है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को सीधा लाभ मिलता है।