महासमुंद,जिंदगी कई बार ऐसे कठिन इम्तिहान लेती है, जिनके सामने इंसान खुद को असहाय महसूस करने लगता है। महासमुंद विकासखंड के ग्राम पंचायत डुमरपाली के आश्रित ग्राम रामपुर की 35 वर्षीय कुमारी बाई कमार का जीवन भी कुछ ऐसा ही था। विवाह के कुछ समय बाद ही पति का असामयिक निधन हो गया, जिससे दो छोटे बच्चों के पालन-पोषण और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कुमारी बाई बांस से बने घरेलू सामान तैयार कर अपनी आजीविका चलाती थीं। किसी तरह दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो जाता था, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं था। जंगल से लगे क्षेत्र में कच्चे मकान में रहते हुए जंगली जानवरों का भय हर रात बना रहता था। ऐसे में पक्का और सुरक्षित घर उनके लिए केवल एक सपना बनकर रह गया था।
इसी दौरान ग्राम पंचायत के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जनमन) आवास योजना की जानकारी मिली। पात्रता के आधार पर उनका नाम योजना में स्वीकृत हुआ और उन्हें पक्का आवास मिला। आज कुमारी बाई अपने दोनों बच्चों के साथ नए पक्के घर में सुरक्षित, सम्मान पूर्वक और निश्चिंत जीवन जी रही हैं। अब उन्हें बारिश, आंधी या जंगली जानवरों का भय नहीं सताता। उनका कहना है कि इस योजना ने उन्हें मकान के साथ उनके परिवार को सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की नई उम्मीद भी दी है। कुमारी बाई ने खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।










