Advertisement Carousel

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया गजरथ यात्रा पुस्तक का विमोचन

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में जशपुर वनमंडल की जनजागरूकता पहल पर आधारित पुस्तक गजरथ यात्रा-भाग 02 का विमोचन किया। यह पुस्तक मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने, हाथियों के संरक्षण और प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करने के लिए वन विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों का दस्तावेज है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर अपनी समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे क्षेत्र में इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व बेहद जरूरी है। लोगों को हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके विचरण क्षेत्रों की जानकारी देकर टकराव की घटनाओं को कम किया जा सकता है।

गांवों से स्कूलों तक पहुंच रहा जागरूकता अभियान

जशपुर वनमंडल पिछले कुछ वर्षों से हाथी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जागरूकता गतिविधियां चला रहा है। इसी अभियान का प्रमुख हिस्सा गजरथ यात्रा है। इसके जरिए गांवों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचकर ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आम लोगों को हाथियों के व्यवहार, भोजन, आवास और विचरण क्षेत्र की जानकारी दी जा रही है।

लोगों को समझाया जा रहा है कि हाथी दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखें, उसके करीब जाने या उसे परेशान करने से बचें और किसी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें।

डर और भ्रम के बजाय वैज्ञानिक समझ पर जोर

अभियान का एक उद्देश्य हाथियों को लेकर ग्रामीण इलाकों में मौजूद भय और भ्रांतियों को दूर करना भी है। वन विभाग लोगों के बीच हाथियों के प्रति संवेदनशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

पुस्तक में जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ ग्रामीणों की भागीदारी, विद्यार्थियों को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने और हाथियों के साथ सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने वाले प्रयासों को भी दर्ज किया गया है।

मोबाइल पर मिलेगी हाथियों की गतिविधियों की जानकारी

हाथियों की निगरानी और समय पर सूचना पहुंचाने के लिए जशपुर वनमंडल तकनीक का भी सहारा ले रहा है। राज संकेत ऐप के जरिए हाथियों की गतिविधि और उनके विचरण की जानकारी मिलने पर संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीणों को मोबाइल संदेश के माध्यम से अलर्ट किया जा रहा है।

समय रहते सूचना मिलने से ग्रामीण हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में जाने से बच सकते हैं और आवश्यक सावधानी बरत सकते हैं। वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों, त्वरित प्रतिक्रिया दल और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय को भी मजबूत किया जा रहा है।

बच्चों को जोड़कर तैयार की जा रही अगली पीढ़ी

गजरथ यात्रा में स्कूलों और विद्यार्थियों को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है। जागरूकता कार्यक्रमों में बच्चों को हाथियों के व्यवहार, जैव विविधता, जंगलों के महत्व और वन्यजीव संरक्षण की जानकारी दी जा रही है।

वन विभाग का प्रयास है कि बच्चे स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी सुरक्षित व्यवहार का संदेश पहुंचाएं।

बेहतर काम करने वाले वनकर्मियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन, जनसुरक्षा और हाथी संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जंगलों में तैनात मैदानी अमले की तत्परता और स्थानीय समुदाय के साथ बेहतर तालमेल इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा के साथ वन और वन्यजीवों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। गजरथ यात्रा में समुदाय, तकनीक और वन विभाग के मैदानी अमले को जोड़कर मानव और हाथियों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व की दिशा में काम किया जा रहा है।

कार्यक्रम में कलेक्टर रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार समेत वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।