रायपुर. राजधानी के समता कॉलोनी इलाके में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है। टाटीबंद स्थित लोहा कारखाने के मालिक और एमबीए पास सुशील अग्रवाल के 66 वर्षीय पिता महेश कुमार अग्रवाल को ठगों ने बैंक ऑफ इंडिया के नाम पर झांसे में लिया। WhatsApp पर भेजी गई फर्जी APK फाइल और बैंक योजनाओं से जुड़े संदेश के जरिए जालसाजों ने उनके मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया। इसके बाद बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड से कुल 5 लाख 32 हजार 990 रुपए निकाल लिए गए।
मामले में आजाद चौक थाने में बीएनएस की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बैंक का लोगो देख बुजुर्ग ने खोला मैसेज
सुशील अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके पिता महेश कुमार अग्रवाल हार्ट पेशेंट हैं और उनकी बाईपास सर्जरी हो चुकी है। 26 सितंबर की शाम करीब 4 बजे उनके WhatsApp नंबर पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।
संदेश भेजने वाले WhatsApp अकाउंट की प्रोफाइल फोटो में बैंक ऑफ इंडिया का लोगो लगा था। मैसेज में सीनियर सिटीजन के लिए सरकारी और बैंक योजनाओं का लाभ लेने की बात कही गई थी। इसके लिए भेजी गई फाइल पर क्लिक करने को कहा गया।
सरकारी योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में बुजुर्ग ने करीब 5 बजे लिंक खोल दिया। इसके बाद उनका मोबाइल जालसाजों के नियंत्रण में चला गया। आरोपियों ने रिमोट एक्सेस के जरिए फोन और उससे जुड़ी बैंकिंग गतिविधियों को निशाना बनाया।
कुछ घंटों में खाते से 50 हजार, क्रेडिट कार्ड से 4.82 लाख साफ
मोबाइल का एक्सेस मिलने के बाद ठगों ने बैंक खाते में ट्रांजेक्शन शुरू कर दिए। बैंक ऑफ इंडिया की जय स्तंभ चौक शाखा के सेविंग्स अकाउंट से 5 हजार रुपए के 10 अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए गए। इस तरह खाते से 50 हजार रुपए निकाल लिए गए।
इसके बाद इसी सेविंग्स अकाउंट से जुड़े बैंक ऑफ इंडिया के क्रेडिट कार्ड को निशाना बनाया गया। क्रेडिट कार्ड से 9 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 4 लाख 82 हजार 990 रुपए निकाल लिए गए।
इस तरह बुजुर्ग को कुल 5 लाख 32 हजार 990 रुपए का नुकसान हुआ।
तीन घंटे में 1930 पर शिकायत, 1.62 लाख रुपए लौटे
परिजनों को ठगी का पता चलते ही उन्होंने बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। घटना के करीब तीन घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराई गई। क्रेडिट कार्ड और सेविंग्स अकाउंट से जुड़ी शिकायतों के नंबर भी तुरंत हासिल कर लिए गए।
समय पर शिकायत दर्ज कराने का असर यह हुआ कि क्रेडिट कार्ड से निकाली गई 4 लाख 82 हजार 990 रुपए की रकम में से 1 लाख 62 हजार 280 रुपए वापस क्रेडिट कार्ड में री-क्रेडिट हो गए हैं।
हालांकि अभी 3 लाख 70 हजार 710 रुपए की रकम वापस नहीं मिली है। पुलिस अब अज्ञात आरोपियों की पहचान करने और बची हुई रकम की रिकवरी के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।
फर्जी बैंक मैसेज से रहें सावधान
इस मामले में ठगों ने बैंक के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर पहले भरोसा बनाया और फिर APK फाइल के जरिए मोबाइल तक पहुंच बनाई। किसी भी अनजान नंबर से आए बैंकिंग मैसेज, APK फाइल या लिंक को खोलने से बचना चाहिए। बैंक या सरकारी योजना से जुड़ा कोई संदेश मिलने पर उसकी पुष्टि संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से करना सुरक्षित तरीका है।











