बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नदी में डूबने से व्यक्ति की मौत के मामले में सरकारी आर्थिक सहायता की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने यानी एस्फिक्सिया का उल्लेख होना इस बात का पुख्ता प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति की मृत्यु पानी में डूबने से ही हुई थी। इसके लिए मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों से मौत की वास्तविक वजह साबित करना भी जरूरी है।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने भगवत प्रसाद केंवट की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपने पिता की कथित तौर पर नदी में डूबने से हुई मौत के आधार पर राज्य सरकार से अनुग्रह राशि देने की मांग की थी। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
शौच के लिए नदी किनारे गए थे पिता, मिर्गी का दौरा पड़ने से हुई थी मौत
मामले के अनुसार, भगवत प्रसाद केंवट के पिता दौराम केंवट 9 जनवरी 2020 को सुबह करीब 7 बजे शौच के लिए नदी के किनारे गए थे। बताया गया कि वह मिर्गी की बीमारी से पीड़ित थे और उन्हें समय-समय पर दौरे पड़ने के साथ चक्कर आने की समस्या भी होती थी।याचिकाकर्ता का दावा था कि घटना वाले दिन नदी किनारे पहुंचने के दौरान उनके पिता को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा। इसके बाद वह नदी में गिर गए और पानी में डूबने से उनकी जान चली गई।घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। मामले में मृतक का पोस्टमार्टम कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मांगी थी आर्थिक सहायता
मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण एस्फिक्सिया यानी दम घुटना बताया गया था। इसे डूबने से हुई मृत्यु के रूप में दर्ज किया गया था। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर मृतक के बेटे ने शासन से आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया।भगवत प्रसाद केंवट ने 20 फरवरी 2020 को कसडोल तहसीलदार के समक्ष आवेदन पेश किया था। इसमें राज्य सरकार के राजस्व पुस्तक परिपत्र यानी आरबीसी के प्रावधानों के तहत अनुग्रह राशि देने की मांग की गई थी।
पटवारी की जांच में तीन फीट गहरे पानी का मिला था उल्लेख
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपनी दलील के समर्थन में पटवारी की जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में घटनास्थल पर करीब तीन फीट गहरा और ठहरा हुआ पानी होने की जानकारी दर्ज थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि नदी किनारे पानी की मौजूदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि उनके पिता की मौत पानी में गिरने के बाद डूबने से हुई थी। इसलिए परिवार को सरकारी नियमों के अनुसार अनुग्रह राशि मिलनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा- दम घुटने का उल्लेख डूबने का पुख्ता प्रमाण नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एस्फिक्सिया दर्ज होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित व्यक्ति की मौत नदी में डूबने से ही हुई है।न्यायालय के अनुसार, मौत के वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए आवश्यक मेडिकल तथा फोरेंसिक साक्ष्य होने चाहिए। केवल घटनास्थल पर पानी मौजूद होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने का उल्लेख होने से दुर्घटनावश डूबकर मृत्यु होने की पुष्टि नहीं होती।
सरकारी मुआवजे के लिए पर्याप्त साक्ष्य जरूरी
सभी तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने भगवत प्रसाद केंवट की अनुग्रह राशि की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दीइस फैसले के जरिए अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी अनुग्रह राशि प्राप्त करने के लिए केवल दुर्घटना का दावा करना पर्याप्त नहीं है। आवेदक को उपलब्ध साक्ष्यों के माध्यम से मृत्यु के कारण और कथित दुर्घटना के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित करना होगा। ऐसे मामलों में मेडिकल और फोरेंसिक प्रमाणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।











