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छत्तीसगढ़ : गन्ना किसानों को बड़ी राहत, भोरमदेव शक्कर कारखाने ने 6.93 करोड़ रुपए किए जारी

कवर्धा. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, कवर्धा द्वारा गन्ना किसानों को एक और बड़ी राहत दी गई है. कारखाने ने हाल ही में 06.93 करोड़ रुपए की राशि जारी करते हुए अब तक कुल 46.77 करोड़ रुपए का भुगतान पूर्ण कर दिया है. समयबद्ध और निरंतर भुगतान से क्षेत्र के गन्ना किसानों में संतोष और उत्साह का माहौल बना हुआ है.

कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया लगातार जारी है, जिससे सहकारी व्यवस्था पर किसानों का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है. कारखाना प्रबंधन के अनुसार यह निरंतरता न केवल किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है, बल्कि कारखाने के सुचारु संचालन को भी स्थायित्व प्रदान कर रही है.

पेराई एवं उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति
पेराई सत्र की जानकारी देते हुए कारखाना प्रबंधन ने बताया कि अब तक 2,33,455 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई पूर्ण की जा चुकी है, जिससे 2,74,322 क्विंटल शक्कर का उत्पादन हुआ है. यह सफलता किसानों के सहयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और कारखाने की कार्यकुशलता का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है.

सहकारिता को सशक्त बनाने की अपील
इसी क्रम में कारखाना प्रबंधन ने शेयरधारक सदस्य किसानों और गैर-सदस्य गन्ना उत्पादकों से सर्वे के अनुरूप अधिकतम गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने की सकारात्मक अपील की है. प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह कोई चेतावनी नहीं, बल्कि सहकारी संस्था को मजबूत करने और किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने का साझा प्रयास है.

प्रबंधन ने बताया कि विगत पेराई सत्र 2024-25 और वर्तमान सत्र 2025-26 में सर्वे अनुमान के अनुरूप गन्ना आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण कारखाने की पूर्ण पेराई क्षमता का उपयोग नहीं हो सका, जिससे पेराई अवधि प्रभावित हुई. पर्याप्त आपूर्ति से उत्पादन बढ़ेगा और भविष्य में भी किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा.

उपविधियों का उल्लेख
कारखाना प्रबंधन ने पंजीकृत उपविधियों का हवाला देते हुए बताया कि उपविधि धारा 07(02)(घ) के अंतर्गत सदस्य किसानों के लिए अपना उत्पादित गन्ना कारखाने में देना अनिवार्य है. वहीं धारा 09(क)(05) में यह प्रावधान है कि लगातार सर्वे के अनुरूप आपूर्ति नहीं करने पर सदस्यता समाप्त की जा सकती है. प्रबंधन ने दोहराया कि इन नियमों का उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि संस्था की निरंतरता और किसानों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा है.

किसानों और श्रमिकों के हित में बहुआयामी प्रयास
कारखाना प्रबंधन ने बताया कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना स्थापना काल से ही क्षेत्र के गन्ना किसानों की आर्थिक और सामाजिक उन्नति का सशक्त माध्यम रहा है. FRP के अतिरिक्त रिकवरी राशि, शासन द्वारा प्रदत्त बोनस का भुगतान, रियायती दर पर शक्कर वितरण, उन्नत बीज उपलब्धता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को निरंतर सहयोग दिया जा रहा है. इसके साथ ही कारखाना परिसर में सर्वसुविधायुक्त बलराम सदन का निर्माण, तथा श्रमिकों व किसानों के लिए मात्र 5 रुपए में गरम भोजन उपलब्ध कराने वाली कैंटीन की शुरुआत सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण है.

अस्तित्व की रक्षा के लिए सामूहिक सहभागिता जरूरी
कारखाना प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यदि पेराई लक्ष्य पूर्ण नहीं हुआ तो कारखाने का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है. अतः सभी सदस्य एंव गैर-सदस्य गन्ना उत्पादकों से आह्वान किया गया कि वे सर्वे के अनुरूप अधिकतम गन्ना आपूर्ति कर सहकारी व्यवस्था को मजबूत बनाएं और क्षेत्र के किसानों के उज्ज्वल भविष्य में सहभागी बनें.