गरियाबंद। गरियाबंद जिले के राजिम तहसील के नजदीक सुरसाबांधा गांव में 18 साल की योगिता सोनवानी की मौत ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। योगिता मानसिक रूप से बीमार थी, लेकिन उसे इलाज के नाम पर तीन महीने तक एक ऐसे घर में रखा गया जहां ना डॉक्टर था, ना दवाई।
सिर्फ प्रार्थना थी, डर था, और चुप्पी।
उसकी मां, सुनीता सोनवानी, बताती हैं कि गांव की कुछ महिलाओं ने एक ईलाज वाली दीदी का पता बताया था। कहा वहाँ प्रार्थना से सब ठीक हो जाता है। और फिर शुरू हुआ ईलाज शरीर पर तेल, गर्म पानी, पैरों से मालिश, और हर रोज़ एक ही वाक्य ईसाई धर्म में शामिल हो जाओ, शैतान छूट जाएगा, ईसा मसीह ठीक करेगा।
बेटी की हालत बिगड़ती रही, लेकिन मां कहीं और नहीं ले जा सकीं। क्योंकि डराया गया अगर बाहर ले गए, तो जान चली जाएगी। और वो डर ही अंत में सच हो गया। और 22 मई को योगिता मर गई। पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टर एस ठाकुर ने बताया की सीने की हड्डी टूटी थी, खून बहा था। इसके बाद कार्डियक अटैक के चलते लड़की की मौत हो गई। यानी जो इलाज था, वो दरअसल यातना थी।
इस लड़की की मौत सिर्फ एक अपराध नहीं है ये हमारी चुप्पी का नतीजा है। गांव में सब जानते थे कि वहाँ क्या हो रहा है। लेकिन कोई नहीं बोला। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ऐसी सेवा उस घर में और लड़कियों के साथ भी चल रही थी। क्या कोई जवाबदेह है? या अगली योगिता की बारी अब भी किसी घर में चल रही है?











