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केंद्र से मिले करोड़ों रुपए लैप्स होने की कगार पर, फंड मिला, लेकिन स्कूलों के निर्माण ठप

रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भेजी गई सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि छत्तीसगढ़ में खर्च नहीं हो पाई है। अफसरों की उदासीनता, बार-बार एमडी बदलने, टेंडर विवादों और प्रशासनिक देरी के कारण इस वित्तीय वर्ष में समग्र शिक्षा मिशन के तहत 650 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लैप्स होने की कगार पर पहुंच गई है। इसके चलते कई निर्माण परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं।

जानकारी के अनुसार, इस वर्ष राज्य में 300 से अधिक स्कूल भवनों का निर्माण, 80 छात्रावासों की इमारतें और 250 से ज्यादा शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इन कार्यों के लिए करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च ही नहीं हो पाई। जिला कलेक्टरों को अलग-अलग मद में राशि भेजी जाती है, लेकिन निर्माण एजेंसी के चयन और अन्य प्रक्रियाओं में होने वाली देरी के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो पाता। विभाग के भीतर अलग निर्माण एजेंसी बनाने की मांग भी लंबे समय से उठ रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

तीन साल पुराने काम भी पड़े हैं अधूरे
स्थिति यह है कि वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 तक के कई निर्माण कार्य अभी तक अधूरे पड़े हैं। कुल 350 से अधिक स्कूल भवनों का निर्माण लंबित है। वर्ष 2025 के ऑडिट में काम की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में खास सुधार नहीं हुआ है।

खेल सामग्री और पीएमश्री स्कूलों की राशि भी अटकी

खेल गढ़िया योजना के तहत लगभग 40 करोड़ रुपये की खेल सामग्री स्कूलों तक पहुंचाई जानी थी, लेकिन टेंडर विवादों के कारण इस साल छात्रों को खेल सामग्री नहीं मिल सकी। वहीं केंद्र की महत्वाकांक्षी पीएमश्री स्कूल योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 341 स्कूलों का चयन किया गया है। प्रत्येक स्कूल को दो-दो करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन कुल 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब तक खर्च नहीं हो सकी है। इसके अलावा शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एससीईआरटी को मिले करीब 3 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हो पाए, क्योंकि बीच में प्रशिक्षण कार्यक्रम बंद कर दिए गए।

जो निविदाएं और कार्य संभव है उसे पूरा करने का काम जारी : आयुक्त

पड़ताल में यह भी सामने आया है कि समग्र शिक्षा मिशन में एमडी के बार-बार बदलने से योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ा है। कई टेंडर मामलों के कोर्ट में चले जाने से भी काम रुक गया। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में 31 मार्च से पहले नई टेंडर प्रक्रिया शुरू होना मुश्किल माना जा रहा है। इस मामले में समग्र शिक्षा मिशन की आयुक्त किरण कौशल ने कहा कि मार्च से पहले जो निविदाएं और कार्य संभव हैं, उन्हें नियमानुसार पूरा करने की प्रक्रिया जारी है।