रायपुर। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने आज अधिसूचना जारी करते हुए राज्य प्रशासनिक सेवा के सात अफसरों को आईएएस अवॉर्ड किया है। इनमें 2008 बैच के दो, 2010 बैच के दो और 2013 बैच के चार अफसर शामिल हैं। इनमें वीरेंद्र बहादुर पंचभाई एक ऐसे अफसर हैं, जिन्होंने नायब तहसीलदार के पद पर ज्वाइन किया था और अब वह आईएएस तक पहुंच गए हैं। वे वर्तमान में एडिशनल कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। वे प्रदेश के एक ऐसे इकलौते अफसर हैं जिन्होंने नायब तहसीलदार से आईएएस तक का सफर तय किया है। अविभाजित मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद यह पहला मामला है, जिसमें किसी नायब तहसीलदार ने प्रमोशन के माध्यम से आईएएस तक का मुकाम हासिल किया हो। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में भी अब तक केवल एक नायब तहसीलदार आईएएस के पद तक पहुंच पाए हैं।
राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को वरिष्ठता और साफ सुधरे रिकॉर्ड के आधार पर आईएएस अवॉर्ड किया जाता है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने कुल सात अफसरों को आईएएस अवॉर्ड किया हैं। इनमें वीरेंद्र बहादुर पंचभाई भी हैं।
बता दें कि वीरेंद्र बहादुर पंचभाई मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रहने वाले हैं। मध्यप्रदेश पीएससी के माध्यम से उनका चयन कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा नायब तहसीलदार के पद पर हुआ। उनका चयन आरक्षित कोटे के आधार पर हुआ था। वे लंबे समय तक रायपुर जिले में कार्यरत रहें। पहले अभनपुर में नायब तहसीलदार फिर तहसीलदार के पद पर उनकी पोस्टिंग हुई। फिर 2010 में वह राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर डिप्टी कलेक्टर बनें।
डिप्टी कलेक्टर के बाद उनका प्रमोशन संयुक्त कलेक्टर फिर अपर कलेक्टर के पद पर हुआ। राजधानी रायपुर में वे लंबे समय तक अपर कलेक्टर रहें। वर्तमान में वीरेंद्र बहादुर पंचभाई बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।
बता दें कि नायब तसीलदार से शुरूआत करने वाला अफसर अधिकतम डिप्टी कलेक्टर या अपर कलेक्टर तक पहुंच कर रिटायर हो जाता है। वो आईएएस नहीं बन पाता।
हालांकि ठाकुर रामसिंह नायब तहसीलदार भी रहे थे और बाद में आईएएस भी बने थे। पर उन्होंने नायब तहसीलदार रहते हुए पीएससी की परीक्षा दिलाई थी और फिर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए थे। इसके बाद प्रमोशन के बाद आईएएस बने। प्रमोटी आईएएस होने के बावजूद वे रायगढ़,बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों के कलेक्टर रहें। रिटायरमेंट से ठीक पहले रायपुर और दुर्ग संभाग के कमिश्नर रहें। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें राज्य निर्वाचन आयुक्त बनाया गया था।










