Maharashtra : महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र बिंदु कहे जाने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सुप्रीमो शरद पवार ने आज बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। मुंबई में अपनी आत्मकथा ‘Lok Majhe Sangaayi’ के विमोचन के दौरान पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद को छोड़ने की घोषणा की है। इस दौरान 82 वर्षीय शरद पवार ने कहा कि मुझे पता है कब रुकना है। मैंने एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं की एक समिति गठित की है, जो अगले अध्यक्ष के बारे में फैसला करेगी।’ बता दें कि शरद पवार के साथ उनकी पत्नी प्रतिभा भी मौजूद थीं।
बता दें कि 4 दिन पहले गुरुवार को शरद पवार ने कहा था कि रोटी पलटने का वक्त आ गया है। किसी ने मुझसे कहा कि रोटी सही समय पर पलटनी है। न पलटे तो कड़वी हो जाती है। इस बयान पर अजीत पवार ने कहा कि नए चेहरों को आगे लाना एनसीपी की परंपरा रही है। एनसीपी महाराष्ट्र (Maharashtra) के महा विकास अघाड़ी गठबंधन में सहयोगी है। दरअसल, पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी बनाई थी। उसके बाद से ही वे पार्टी के अध्यक्ष थे। पवार के ऐलान के बाद पार्टी कार्यकर्ता उनके समर्थन में नारे लगाने लगे। वे उनसे अपना फैसला वापस लेने की मांग कर रहे थे।
Maharashtra : अध्यक्ष चुनने के लिए कमेटी बनाई गई
पवार के इस्तीफे के बाद पार्टी का अध्यक्ष चुनने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इसमें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तडकारे, केके शर्मा, पीसी चाको, अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले, छगन भुजबल, दिलीप पाटिल, अनिल देशमुख, राजेश टोपे, जितेंद्र अह्वाद, हसन मुशरिफ, धनंजय मुंडे, जयदेव गायकवाड़ का नाम शामिल है।
Maharashtra : इसलिए कांग्रेस से अलग हुए थे शरद पवार
बता दें कि 1999 में शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का विरोध किया। तीनों का कहना था कि प्रधानमंत्री देश का ही व्यक्ति बने। इस वजह से तीनों को पार्टी से निकाल दिया गया और तीनों ने मिलकर 25 मई 1999 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया। हालांकि, इसके बाद लगातार 15 साल तक महाराष्ट्र में राकांपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकार रही।









