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आदिवासियों ने खुद के लिए बनाई बिजली, गांव के सभी घरों में 5-5 बल्ब का कनेक्शन देंगे

छत्तीसगढ़ में पहली बार “झरने’ से बनाई जा रही बिजली

रायगढ़। छत्तीसगढ़ में पहली बार पहाड़ी झरने से बिजली उत्पादन का प्रयोग सफल हुआ है। एक सामाजिक वैज्ञानिक की कोशिशों से रायगढ़ जिले के सुदूर जंगलों में बसे दो गांवों के ग्रामीणों ने खुद के लिए बिजली बनाई है। अब इन गांवों के प्रत्येक घर को 5-5 बल्ब का बिजली कनेक्शन देने की तैयारी है। इस बिजली से गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी को भी रोशन किया जाएगा।
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक में पहाड़ी पर उरांव जनजाति के दाे गांव है। छाता नाला के दोनों किनारे पर बसे माली कछार और बेलसिंगा गांव में ग्रिड से बिजली नहीं पहुंच पाई है। सामाजिक वैज्ञानिक प्रो. डी. एस. मालिया ने बताया कि इस गांव के ऊपर पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक झरना जिसे स्थानीय लोग “बिरनी माड़ा’ कहते हैं।

20 साल पहले आया था विचार

प्रो. मालिया ने बताया, ऐसे क्षेत्रों में माइक्रो हाइडल प्रोजेक्ट का आइडिया उनको 20 साल पहले आया था। संसाधनों के अभाव में यह हो नहीं पाया। इस साल मित्रों आलोक शुक्ला, प्रमोद चंदेल और गुलाब पटेल की आर्थिक मदद से उन्होंने इस पर काम शुरू किया। एक सप्ताह तक गांव के 25-30 लोगों की मदद से यह प्रयोग चला। अब यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। झरने के पानी की मदद से 10 टरबाइन चला।

इसकी वजह से 10 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। टरबाइन से जुड़े जेनरेटर ने जैसे ही वहां लगे 100-100 वॉट के बल्बों को रोशन किया, लोग खुशी से चीख पड़े। लोगों ने तालियां बजाकर अपनी कोशिशों से बनाई रोशनी का स्वागत किया। प्रो. मालिया का कहना है, उनकी यह टीम अगले 15 दिनों में गांव के सभी 26 घरों में 5-5 बल्ब का कनेक्शन जोड़ देगी। वहीं गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र को भी इस बिजली से रोशन किया जाएगा। टरबाइन पर तेज गति से गिरते झरने के पानी ने जेनरेटर चलाया।

बड़ी चुनौती थी टरबाइन तक निरंतर पानी पहुंचाना

परियोजना के कर्ताधर्ता प्रो. डी.एस. मालिया ने बताया, इस काम में झरने के पानी को टरबाइन तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। झरना समुद्र तल से 1600 फीट की ऊंचाई पर है। यहां से सेक्सन पाइप से पानी लाकर टरबाइन चलाना था। यहां पहुंचने के लिए पगडंडियों के सहारे खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ी। इतनी ऊंचाई पर भारी मशीनों और पाइप आदि सामान पहुंचाने में बहुत दिक्कतें आती, लेकिन गांव के उत्साही लोगों के सहयोग ने इसे आसान बना दिया।
इस ऊंची पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में झरना है, जहां तक सक्शन पाइप पहुंचाना था।

अभी यह प्रयोग था, आगे बड़ा काम

प्रो. डी.एस. मालिया का कहना है, उन्होंने इस प्रोजेक्ट को “Project Light For Life ” का नाम दिया है। यह लघु जल विद्युत परियोजना है, जिसके लिए क्रास फ्लो टरबाइन का इस्तेमाल हुआ है। पहले प्रयोग में 100% बिजली उत्पादन में सफलता मिली है। आगे पानी के ऐसे ही स्रोत का इस्तेमाल कर थोड़ा बड़ा काम किया जाएगा। प्रो. मालिया का कहना है, ऐसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जहां ग्रीड से बिजली जाना अभी बाकी है वहां इस तरह का काम किया जा सकता है।
टरबाइन तक पाइप पहुंच गया तो उसे फिक्स कर पानी को नियंत्रित किया गया।

रायगढ़ और कोरबा में 30 किलोवॉट उत्पादन की तैयारी

माली कछार और बेलसिंगा गांव में बिजली पहुंचाने का काम पूरा होने के बाद प्रो. मालिया रायगढ़ जिले के दो अन्य गांवों और कोरबा जिले के एक गांव में ऐसा ही प्रोजेक्ट शुरू करने वाले हैं। प्रो. मालिया ने बताया, इन गांवों में 30 किलोवॉट का माइक्रो हाइडल प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। उस पर भी जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा। अगर सरकार चाहे तो अपना गांव अपनी बिजली परियोजना को लागू कर ऐसे क्षेत्रों में बिजली की समस्या का समाधान कर सकती ह