मध्य प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा का बारहवां
दिन, राहुल गांधी आज करेंगे राजस्थान में प्रवेश
भोपाल। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का रविवार 4 दिसंबर को बारहवां दिन है। सुसनेर के लालाखेड़ी मालवा से होते यात्रा राजस्थान के झालावाड की ओर रवाना हुई। कबीर गायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया के द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई।
सुबह 10 बजे यात्रा ने गर्ल्स हास्टल के पास ब्रेक लिया, जिसके बाद दोपहर 3:30 बजे फिर शुरू हुई, जो 6:30 बजे पिपलेश्वर बालाजी मंदिर डोंगरगांव पहुंची। शाम 7 बजे राष्ट्रीय ध्वज हस्तांतरण पधारो राजस्थान स्वागत सभा हुई। जिसके बाद चवली में यात्रा का रात्रि विश्राम हुआ।
सुसनेर में शनिवार को यात्रा के भोजन विश्राम के दौरान राहुल गांधी ने प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से आए किसानों से सीधा संवाद किया। हालांकि किसानों में कांग्रेस नेता भी शामिल रहे। शाजापुर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रामवीरसिंह सिकरवार भी किसान के रुप में मौजूद दिखे। राहुल गांधी ने किसानों उनकी समस्याओं के बारे में जाना।
चर्चा के दौरान आगर-मालवा, शाजापुर, रीवा, शिवपुरी, हरदा, ग्वालियर आदि जिलों के करीब 30 किसान मौजूद रहे। इस दौरान फसल की बुवाई से लेकर उपज के बेचने तक में होने वाली दिक्कतें राहुल गांधी को बताईं।
जिसमें खाद-बीज की समस्या, शाजापुर के विकसित किसान और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामवीरसिंह सिकरवार ने बताया कि सोयाबीन, गेहूं, प्याज और लहसुन की खेती में जो लागत होती है और उसके बाद मंडी में जिस तरह की कठिनाई बेचने में आती है। उसे लेकर अपनी बात रखी।
मंदसौर क्षेत्र के किसान ने अफीम की खेती में एनडीपीएस एक्ट के दुरुपयोग व अन्य समस्या बताईं। राहुल गांधी ने किसानों की इन समस्याओं के निराकरण के लिए कहा कि किसान की भी फिक्र सरकार को की करना चाहिए। किसान देश की रीढ़ है अन्नदाता है और देश को चलाना वाला किसान ही होता है।
राहुल तक फिर पहुंची हसदेव की व्यथा

राहुल गांधी से हसदेव मुद्दे पर चर्चा करते सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला
राहुल गांधी भातर जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं। इस यात्रा में वो जल, जंगल जमीन को बचाने की बात करते देखे जाते हैं। इस बार हसदेव का मामला उनतक पहुंचा है।
सरगुजा के हसदेव जंगलों को काटकर कोल खदानें बनाई जाएंगी। सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध की आवाज अब भारत जोड़ो यात्रा के जरिए राहुल गांधी तक पहुंची है।
सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए। यात्रा में उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की। चलते-चलते कहा कि छत्तीसगढ़ के हसदेव इलाके में कोल प्रोजेक्टस की वजह से जंगलों को बड़ा नुकसान हो रहा है। आप इस मामले में संज्ञान लें।
लोग 250 दिनों से धरना दे रहे हैं, कोई राहत अब तक नहीं मिली है। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा- ये मामला मेरी जानकारी में है, मैं इसे देख रहा हूं। आलोक की राहुल गांधी से ये मुलाकात एमपी के आगर इलाके में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हुई।
लंदन में भी छात्र हसदेव पर पूछ चुके हैं राहुल से सवाल

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ढाबे में चाय ब्रेक लेते राहुल गांधी
करीब 6 महीने पहले सरगुजा, सूरजपुर और कोरबा जिलों में फैले हसदेव अरण्य में कोयला खनन का मुद्दा लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में उठा था। वहां पहुंचे राहुल गांधी से स्टूडेंट ने इसके बारे में सवाल किया। जवाब में राहुल गांधी ने कहा, वे इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर बात कर रहे हैं।
जल्दी ही इसका नतीजा दिखेगा। राहुल गांधी पिछले चार दिन लंदन में रहे । वे वहां कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में आयोजित संवाद में हिस्सा लेने पहुंचे । उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के “कॉर्पस क्रिस्टी कॉलेज’ में आयोजित “इंडिया@75′ कार्यक्रम में स्टूडेंट्स के साथ बातचीत की थी। इन छात्रों में अधिकतर भारतीय मूल के थे।
8 हजार पेड़ कट चुके अब तक

हसदेव मामले में आंदोलनरत सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला ने बताया कि लोगों के विरोध के बाद भी हसदेव इलाके में पेड़ों की कटाई हुई। करीब 8 हजार पेड़ काट दिए गए। सितंबर के महीने में ये सब कुछ हुआ। विरोध बढ़ा मामला अदालत में पहुंचा तो कटाई पर रोक लगी। विवाद अब भी जारी है।
दो सप्ताह बाद बड़ा कार्यक्रम

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मध्यप्रदेश में पदयात्री
हसदेव इलाके में बीते 250 दिनों से ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। आलोक ने बताया कि दिसंबर के आगामी सप्ताह में इस इलाके में बड़ा आंदोलन करने जा रहे हैं। पूरे प्रदेश से लोग जुटेंगे, आंदोलन को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। क्योंकि खनन से जुड़े कॉर्पोरेट घराना सक्रिय होकर खदानें शुरू करने की कोशिश में हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी गया है मामला
हसदेव मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद-ICFRE की अध्ययन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। ICFRE ने दो भागों की इस रिपोर्ट में हसदेव अरण्य की वन पारिस्थितिकी और खनन का उसपर प्रभाव का अध्ययन किया है।
हसदेव अरण्य में हजारों पेड़ों की कटाई के बाद केंद्र सरकार और राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने वादा किया है कि वे अगली सुनवाई तक कोई पेड़ नहीं काटेंगे। यह वादा उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति डी.वाई चंद्रचूड़ और हिमा कोहली की बेंच के सामने किया गया। यह बेंच हसदेव में कोयला खदानों के लिए वन भूमि आवंटन को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई कर रही है।
इन मांगों पर आंदोलन

हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजना निरस्त किया जाए।
बिना ग्रामसभा की सहमति के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल बेयरिंग एक्ट के तहत किए गए भूमि अधिग्रहण को तत्काल निरस्त किया जाए।
पांचवी अनुसूची क्षेत्र में किसी भी कानून से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के पूर्व ग्रामसभा से अनिवार्य सहमति के प्रावधान लागू किए जाएं।
परसा कोल ब्लाक के लिए ग्राम सभा फर्जी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई वन स्वीकृति को तत्काल निरस्त किया जाए और ऐसा करने वाले अधिकारी और कम्पनी पर FIR दर्ज हो।
घाटबर्रा गांव के निरस्त सामुदायिक वन अधिकार को बहाल करते हुए सभी गांवों में सामुदायिक वन अधिकार और व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता दी जाए।
अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का पालन कराया जाए।
ऐसा है हसदेव अरण्य का संकट
2010 में नो-गो क्षेत्र घोषित होने के बाद कुछ समय के लिए यहां हालात सामान्य रहे। केंद्र में सरकार बदली तो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कोयला खदानों का आवंटन शुरू हुआ। ग्रामीण इसके विरोध में आंदोलन करने लगे। 2015 में राहुल गांधी इस क्षेत्र में पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों का समर्थन किया। कहा था – इस क्षेत्र में खनन नहीं होने देंगे। छत्तीसगढ़ में सरकार बदली लेकिन इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर रोक नहीं लग पाई।
हाल ही में भारतीय वानिकी अनुसंधान परिषद (ICFRE) ने एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक हसदेव अरण्य क्षेत्र को कोयला खनन से अपरिवर्तनीय क्षति होगी जिसकी भरपाई कर पाना कठिन है। इस अध्ययन में हसदेव के पारिस्थितिक महत्व और खनन से हाथी मानव द्वंद के बढ़ने का भी उल्लेख है।











