भाभा रिसर्च सेंटर मुंबई व कृषि विवि रायपुर का
शोध,फसल पकने में लगने वाला समय घटाया
रायपुर। धान के कटोरे की दुर्लभ और विलुप्त होती प्रजाति गठुवन Gathuvan dhan में कई तरह के औषधीय गुण मिले हैं। इस चावल के नियमित इस्तेमाल से हड्डियों की बीमारियां दूर होने का दावा किया जा रहा है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर Indira Gandhi krishi vishwavidyalaya Raipur ने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) Bhabha Atomic research center Mumbai (Barc)मुंबई के साथ मिलकर चार साल तक चावल की इस किस्म पर रिसर्च किया है। इस दौरान गठुवन में ऐसे तत्व मिले जो हड्डियों के इलाज में लाभदायक हैं।
कृषि विवि के वैज्ञानिक इसका दावा कर रहे हैं। हालांकि अभी प्रारंभिक शोध चूहों पर करके देखा गया है। इसके नतीजे अच्छे रहे हैं। अब इसके ट्रायल का दायरा बढ़ाया जाएगा। पौधे की लंबाई अधिक होने की वजह से इसके पकने में भी धान की अन्य किस्मों से अधिक समय लगता है।
नतीजा किसानों ने इसकी पैदावार लगभग बंद कर दी थी। इंदिरा गांधी कृषि विवि में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि गठुवन की पैदावार और इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए उत्परिवर्तन विधि यानी म्यूटेशन ब्रीडिंग से इसकी लंबाई कम की जा रही है।
साथ ही पकने की अवधि को भी घटाया जा रहा है। इसके बाद किसानों को इस पैदावार के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे गठुवन की किस्म को भी बचाया जा सकेगा।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया-इस मामले
में सही साबित हुआ पारंपरिक ज्ञान
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की पुरानी किस्मों में औषधीय गुण है। पारंपरिक ज्ञान के आधार पर कुछ किस्में अलग-अलग बीमारियों को ठीक करती हैं। जैसे गठुवन में जोड़ों के दर्द निवारण और लायचा में त्वचा संबंधी समस्याओं के निवारण के गुण हैं।
अब वैज्ञानिक आधार पर भी यह साबित होने लगा है कि धान की किस्मों को लेकर किसानों के पारंपरिक ज्ञान सही हैं। इंदिरा गांधी कृषि विवि ने इससे पहले डायबिटीज और एनीमिया जैसी बीमारियों में लाभदायक साबित होने वाली धान की किस्मों पर भी शोध किया है।
पेस्ट बनाने पर विचार किया जा रहा
आईजीकेवी के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि गठुवन चावल में औषधीय गुण पाए गए हैं। वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो गया है कि यह आर्थराइटिस रोग को ठीक करने में कारगर साबित हो सकता है। इसका पेस्ट बनाने पर भाभा एटॉमिक के वैज्ञानिकों से चर्चा की जा रही है।
कई किस्मों में औषधीय गुण मिले
प्रदेश में धान की जो पारंपरिक किस्में हैं, उसमें कई तरह के गुण है। इनको वैज्ञानिक आधार पर चिह्नांकित किया गया है। हमारे वैज्ञानिकों ने बार्क के साथ काम किया है। कई किस्मों में औषधीय गुण मिले हैं।
डॉ. गिरीश चंदेल, कुलपति, आईजीकेवी











