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बदलेगा माहौल, बदलेगी तस्वीर के नारे के साथ भारत जोड़ो यात्री निकले सड़क पर

भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी

के साथ उमड़ रहा जनसमुदाय

तिरुअनंतपुरम। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का मंगलवार 20 सितंबर को शानदार 13वां दिन था। इन दिनों ये यात्रा केरल राज्य में है। राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं के साथ अलाप्पुझा के चेरथला की यात्रा की।
एक दिन पहले इस यात्रा ने 16 किमी की दूरी तय की थी। भारत जोड़ो यात्रा 1 अक्टूबर को कर्नाटक में प्रवेश करने से पहले 19 दिनों की अवधि में सात जिलों को छूते हुए 450 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए केरल से होकर गुजरेगी। यात्रा 21 और 22 सितंबर को एर्नाकुलम जिले से होकर 23 सितंबर को त्रिशूर पहुंचेगी।

गांधी ने अपनी 150 दिनों की लंबी यात्रा के लिए केरल में भारी संख्या में लोगों के जुटने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोग उनकी यात्रा में शामिल हो रहे हैं क्योंकि वे समझते हैं कि देश का भविष्य खतरे में है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले कुछ दिन में केरल को आत्मविश्वास से भरा देखा है क्योंकि राज्य नफरत, आक्रोश या हिंसा में विश्वास नहीं करता है।

उन्होंने कहा कि ये आम लोग ही हैं, जिनके माध्यम से यह देश चलता है और इन्हीं को फैलाई जा रही नफरत की कीमत चुकानी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि हम आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा को इस देश को विभाजित करने नहीं देंगे और हम ऐसे भारत को स्वीकार नहीं करेंगे, जहां लाखों भारतीय बेरोजगार हों।

पदयात्रा के लिए छोड़ दी

एयर इंडिया की नौकरी

केरल से दीपक असीम

राहुल गांधी की भारत जोड़ो पदयात्रा में शामिल होने के लिए बीस साल की अतीशा ने एयर इंडिया की नौकरी ठुकरा दी। नासिक महाराष्ट्र की अतीशा को एयर इंडिया की तरफ से जॉइनिंग लेटर आ गया था।

लाखों का पैकेज था। मगर अतीशा को कांग्रेस की तरफ से भी पदयात्रा के लिए चुन लिया गया था। उनके सामने दुविधा थी कि किसे चुनें।

अतीशा ने एक मिनिट भी नहीं लगाया और पदयात्रा को चुना। घर पर आय का माध्यम पिता की पेंशन है। पिता पहले सरकारी नौकरी में थे।

यह लड़की कांग्रेस के लिए दीवानी है। यूथ कांग्रेस की नेशनल जाइंट सेक्रेट्री है। दो तीन साल पहले ही कांग्रेस जॉइन की है।

पूछा कि कांग्रेस क्यों जाइन की, तो कहने लगीं कांग्रेस देशभक्त है। उसका पूरा इतिहास देश के लिए मर मिटने का है। खुद मैं चाहती हूं कि देश के लिए जान दूं और मेरा शव तिरंगे में लिपटा हो।

मगर राष्ट्रवाद को दावा तो किसी और का है? इस सवाल के जवाब में अतीशा ने कहा कि जिनके मुख्यालय पर तिरंगा झंडा जबरन लगाया गया हो, जिन्होंने हमेशा तिरंगे का विरोध किया हो, जो अंग्रेजों के मुखबिर और पिट्टू रहे हों, वो राष्ट्रवाद का दावा केवल लोगों को उल्लू बनाने के लिए करते हैं।

उनके दिल में राष्ट्रवाद नहीं नफरतें हैं। तकलीफ पदयात्रा में यही है कि अचानक हमारा जीवन बिल्कुल बदल गया है। सोना, उठना, बैठना, खाना, पीना सबका समय बदल गया है। यहां बहुत कम पानी में सब काम निपटाना पड़ता है।

कांग्रेस के भी थे एक अटल

पूर्णकालिक भारत पदयात्रियों में एक प्रतिभा अटल पाल भी हैं। कानपुर से हैं। अटल उनका सरनेम नहीं है। पति का नाम भी नहीं है। यह उनके ससुर का नाम है।

ससुर कांग्रेसी थे। इंदिरा गांधी ने उन्हें यह उपाधि दी थी। तबसे ससुर नाम के साथ अटल जोड़ने लगे और यह पूरे खानदान की उपाधि हो गई।

ससुर का नाम किशनलाल अटल पाल था। एक बार विधायक का टिकिट मिला। इंदिरा जी ने ऐन समय पर टिकिट वापस मांग कर किसी दूसरे को दे दिया।

कानपुर की जनता इस बात से इतनी नाराज़ हुई कि दस विधानसभा सीटों में से केवल वही एक सीट कांग्रेस हारी, जिस पर से अटल का टिकिट वापस लिया गया था।

प्रतिभा बहुत अच्छी और सधी हुई हिंदी बोलती हैं। बिल्कुल सहज। पति राजनीति करना चाहते थे। पति की सरकारी नौकरी लग गई। तो पति ने कहा तुम राजनीति करो। शादी के दो साल बाद प्रतिभा राजनीति में उतर गईं।

सास ने भी कहा कि राजनीति हमारे खानदान की पहचान है। कोई तो होना चाहिए। प्रतिभा अटल पाल कांग्रेस के संगठन चुनाव लड़ीं। जीतीं। खुद उनकी उम्र पैंतालीस साल है। बड़े बड़े बच्चे हैं। मगर वे पदयात्रा में हैं और उन्हें कोई तकलीफ नहीं है। शारीरिक रूप से सक्षम और मज़बूत हैं।

राहुल ने कहा अपना मीडिया खुद बनना है

राहुल गांधी भारत जोड़ो पदयात्रियों से बंद कमरे में भी बात करते हैं। मीडिया की बेरुखी पर उन्होंने पदयात्रियों से कहा कि मीडिया हमारा नहीं है।

मीडिया हमारे साथ इंसाफ नहीं करने वाला है। हमें अपना मीडिया खुद बनना है। यहां से लौटने के बाद गांव-गांव, गली-गली खुद जाना है। मीडिया से कोई उम्मीद हमें नहीं है।