रायपुर। खनिज विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड (डीजीएमएल) ने राज्य में हाल ही में प्राप्त संयुक्त अनुज्ञा क्षेत्र में निकेल, क्रोमियम और प्लेटिनम समूह के तत्वों (पीजीई) की खोज की है। बता दें कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनके सतत विकास के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।
यह खोज महासमुंद जिले के भालुकोना-जामनीडीह निकेल, क्रोमियम और पीजीई ब्लॉक में हुई है, जो लगभग 3000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस क्षेत्र का प्रारंभिक अन्वेषण भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा जी4 स्तर पर किया गया था, जिसमें इन खनिजों की उपस्थिति की संभावना प्रकट हुई थी। इस आधार पर छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग के अंतर्गत भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय (डीजीएम) ने विस्तृत भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन कर ब्लॉक की ई-नीलामी प्रक्रिया संपन्न कराई।
अब तक 700 मीटर लंबी पट्टी की पहचान
अब तक लगभग 700 मीटर लंबी खनिजीकृत पट्टी की पहचान की गई है, जो संभावित मैफिक-अल्ट्रामैफिक चट्टान संरचनाओं में स्थित है। भू-भौतिकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त संकेतों के अनुसार, 300 मीटर गहराई तक सल्फाइड खनिजों की उपस्थिति दर्ज की गई है।
अब तक 51 खनिज ब्लॉकों की नीलामी
राज्य शासन द्वारा रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसका प्रमाण 2024-25 के अन्वेषण प्रस्तावों में परिलक्षित होता है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक प्रस्ताव इन्हीं खनिजों पर केंद्रित हैं। अब तक राज्य द्वारा 51 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिनमें ग्रेफाइट, निकल, क्रोमियम, पीजीईएस, लिथियम, ग्लॉकोनाइट, फॉस्फोराइट और ग्रेफाइट-वैनाडियम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 6 टिन ब्लॉकों को भारत सरकार के खनिज मंत्रालय को आगामी नीलामी के लिए सौंपा गया है।













