Budget 2026 : आज देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साल 2026 का बजट पेश कर दिया है। इस बजट ने नौकरीपेशा , पेंशनर, मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा वर्ग को थोड़ा निराश जरूर किया है क्यूंकि इस बजट में इनके लिए कुछ खास नहीं दिखा। इस साल इनकम टैक्स स्लैब और इनकम टक्स छूट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। इस बार व्यक्तिगत आयकर (Personal Income Tax) की दरों में कोई बड़ा फेरबदल नहीं देखने को मिला। नए इनकम टैक्स के नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 में आम आदमी के टैक्स स्लैब में भले ही बदलाव न हुआ हो, लेकिन टैक्स प्रणाली को उदार और ‘डिजिटल-फ्रेंडली’ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
1. टैक्स स्लैब और फाइलिंग की समयसीमा
यथास्थिति बरकरार: इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। करदाताओं को पुरानी या नई व्यवस्था (Old or New Regime) के अनुसार ही टैक्स देना होगा।
ITR की डेडलाइन: ITR-1 और ITR-2 (सैलरीड क्लास) के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी। नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट के लिए यह सीमा 31 अगस्त तय की गई है।
रिवाइज्ड रिटर्न: अब कुछ शुल्क के साथ 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न (Revised Return) भरने की सुविधा मिलेगी।
2. छोटे करदाताओं के लिए ‘ऑटोमेशन’ का तोहफा
बिना भागदौड़ के TDS सर्टिफिकेट: अब ‘लोअर’ या ‘निल’ TDS सर्टिफिकेट के लिए अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने होंगे। यह प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑटोमैटिक और नियम-आधारित होगी।
जुर्माने में नरमी: अकाउंट ऑडिट न होने जैसी तकनीकी गलतियों पर अब ‘पेनाल्टी’ की जगह सिर्फ ‘फीस’ लगेगी। छोटे मामलों में जेल की सजा के बजाय केवल जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
3. शिक्षा, स्वास्थ्य और विदेशी संपत्ति नियम
TCS दरों में कटौती: विदेश में शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए TCS (Tax Collected at Source) की दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है।
Foreign Asset Disclosure Scheme: छोटे करदाताओं के लिए विदेश में मौजूद संपत्ति का खुलासा करना आसान होगा। salaried employees Budget 2026 एक सीमित राशि तक की विदेशी आय बताने पर भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा मिलेगी।
4. NRI और निवेश पर असर
NRI को प्रोत्साहन: भारत में कैपिटल गुड्स सप्लाई करने वाले NRI को 5 साल तक इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी। इसके अलावा, विदेशियों के लिए 5 साल तक भारत में रहने पर टैक्स संबंधी कुछ विशेष राहतें प्रस्तावित हैं।
शेयर बाजार और बायबैक: शेयर बायबैक से होने वाली आय पर अब कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। फ्यूचर्स ट्रेडिंग (Futures) पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
5. कस्टम ड्यूटी और अन्य सुधार
सरल ढांचा: कस्टम ड्यूटी के स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाया जाएगा ताकि व्यापार में आसानी हो।
टैक्स डिमांड में राहत: कोर टैक्स डिमांड की सीमा को 20% से घटाकर 10% करने का प्रस्ताव है।








