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पुराने कागजों में छिपा था करोड़ों का खेल…जांच शुरू होते ही खुलने लगीं परतें

 जांजगीर-चांपा : जमीन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी कर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर कब्जा करने की साजिश का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर चांपा पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर रची गई साजिश

शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम चांपा स्थित खसरा नंबर 958 की पांच डिसमिल जमीन वर्ष 1954-55 से उनके दादा गोकुल सोनी के नाम दर्ज थी। आरोप है कि वर्ष 1985-86 में राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर इस जमीन को महासमुंद जिले के मल्दामाल निवासी गोकुल भोई के नाम दर्ज कर दिया गया। इसी बदलाव के आधार पर आगे पूरी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की गई।

झांसा देकर कराया मुख्तियारनामा

जांच में सामने आया कि नवंबर-दिसंबर 2025 के दौरान आरोपियों ने गोकुल भोई से संपर्क कर उसे यह कहकर भरोसे में लिया कि चांपा में उसके नाम 15 डिसमिल जमीन है। बदले में 19 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया। मना करने के बावजूद उसे सारंगढ़ उप पंजीयक कार्यालय ले जाकर मुख्तियारनामा तैयार करा लिया गया।

फर्जी भुगतान के सहारे जमीन की रजिस्ट्री

मुख्तियारनामा मिलने के बाद फरवरी 2026 में जमीन की रजिस्ट्री करीब 77.79 लाख रुपये में कर दी गई। आरोप है कि इसके बदले गोकुल भोई के नाम करीब 19.22 लाख रुपये का चेक दिया गया, लेकिन वह बैंक में भुगतान योग्य नहीं निकला। इससे पूरे लेनदेन पर संदेह गहरा गया।

जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य

पुलिस और प्रशासनिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ के दौरान गोकुल भोई ने बताया कि वह कभी चांपा नहीं गया और वहां उसकी कोई जमीन नहीं है। वहीं दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि से भी कथित छेड़छाड़ मिलने की बात सामने आई। राजस्व जांच में पुराने अभिलेखों और संशोधन पंजी में कटिंग कर फर्जी प्रविष्टियां दर्ज किए जाने के संकेत भी मिले हैं।

धोखाधड़ी का मामला दर्ज, जांच जारी

प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस ने संदीप ठाकुर, संतोष यादव और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति हड़पने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर यह पता लगा रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर किया गया।