Advertisement Carousel

जनप्रतिनिधियों के लंबित मामलों पर हाईकोर्ट सख्त, अब तेजी से चलेगी सुनवाई, कई चर्चित नामों की फाइलें भी दायरे में

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य की विभिन्न अदालतों को लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने को कहा है।

लंबित मामलों की संख्या में आई कमी

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र डॉ. एन.के. शुक्ला ने अदालत को बताया कि पिछली स्टेटस रिपोर्ट की तुलना में जनप्रतिनिधियों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की संख्या में दो मामलों की कमी दर्ज हुई है। इनमें एक मामला रायपुर और दूसरा कबीरधाम जिले का है, जिनका इस अवधि में निपटारा हो चुका है।डिवीजन बेंच ने इस प्रगति को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 25 अगस्त 2026 तय की और तब तक अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बिलासपुर, बलौदाबाजार और जांजगीर में भी चल रही सुनवाई

रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 तक बिलासपुर जिले में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला विचाराधीन है।बलौदाबाजार जिले में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा सीजेएम कोर्ट में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा और अन्य से जुड़े मामलों की सुनवाई जारी है।वहीं जांजगीर-चांपा जिले में विधायक बालेश्वर साहू और अन्य के खिलाफ दर्ज प्रकरण में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।

रायपुर की अदालतों में कई चर्चित मामले विचाराधीन

रायपुर की विभिन्न अदालतों में भी कई चर्चित जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई जारी है। पीएमएलए और ईडी की विशेष अदालत में देवेंद्र यादव, चंद्रदेव प्रसाद राय और कवासी लखमा से जुड़े मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया चल रही है।इसके अलावा सीजेएम रायपुर की अदालत में संजीव शुक्ला, देवेंद्र यादव, उद्देश्वरी करा, आकाश शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से संबंधित मामलों की सुनवाई भी जारी है।

सभी ट्रायल कोर्ट से मांगी गई ताजा रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले संबंधित सभी ट्रायल कोर्ट से ताजा स्थिति रिपोर्ट प्राप्त कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। साथ ही आदेश की प्रति तत्काल संबंधित निचली अदालतों को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लंबित मामलों की अद्यतन प्रगति समय पर हाईकोर्ट के समक्ष रखी जा सके।