Petrol-Diesel : स्वतंत्रता दिवस की आधी रात केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़ा अहम फैसला लेते हुए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती कर दी। सरकार का यह निर्णय वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर नया टैक्स कितना होगा
नई अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर पहले लगने वाला 3.50 रुपए प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं डीजल के निर्यात शुल्क को 25.50 रुपए से घटाकर 24 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर लगने वाला टैक्स 22 रुपए से कम होकर 19.50 रुपए प्रति लीटर रह गया है। यानी एटीएफ पर 2.50 रुपए प्रति लीटर की राहत दी गई है।
क्यों दोबारा लागू किया गया था विंडफॉल टैक्स
मार्च 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई थी। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने विंडफॉल टैक्स फिर से लागू किया था। इससे पहले जुलाई 2022 में पहली बार यह टैक्स लगाया गया था, ताकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से तेल कंपनियों को होने वाले अतिरिक्त लाभ पर कर लगाया जा सके। बाद में परिस्थितियां सामान्य होने पर इसे हटा दिया गया था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल पर सरकार की नजर
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। ऐसे में सरकार लगातार बाजार की स्थिति की समीक्षा कर रही है।
हर दो सप्ताह में होती है निर्यात शुल्क की समीक्षा
भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में होने वाले बदलावों के आधार पर हर दो सप्ताह में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। इसी प्रक्रिया के तहत जरूरत के अनुसार निर्यात शुल्क में बदलाव किया जाता है, ताकि बाजार की मौजूदा स्थिति के अनुरूप कर व्यवस्था संतुलित बनी रहे।
क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी
विंडफॉल टैक्स में कटौती का सीधा असर पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ता। यह टैक्स केवल कच्चे तेल का उत्पादन करने वाली और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों के अतिरिक्त लाभ पर लगाया जाता है। इसलिए इस टैक्स में कमी आने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं होती।










