कंप्यूटर खरीदा और घर से शुरू किया काम
बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह के माध्यम से ऋण मिलने के बाद उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और अपने घर से ही फोटो कॉपी तथा कंप्यूटर से जुड़े काम शुरू किए। गांव में यह सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए दूर जाने की जरूरत कम हुई।इस काम से बबली को नियमित आमदनी का एक माध्यम मिला और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा। एक छोटे प्रयास से शुरू हुआ यह काम उनके लिए आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत साबित हुआ।
मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से बढ़ाई आमदनी
आय के एक ही स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय बबली यादव ने खेती से जुड़े अन्य कार्यों को भी अपनाया। उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे अतिरिक्त कमाई होने लगी। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के काम से भी जुड़ी हैं।इन अलग-अलग गतिविधियों ने उनकी आय बढ़ाने में मदद की है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और महिलाओं की भागीदारी को भी प्रोत्साहन मिला है।
हर महीने करीब 10 हजार रुपये की कमाई
बबली यादव के अनुसार फोटो कॉपी और कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन तथा महुआ खरीदी से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इस आय से वे परिवार की जरूरतों को पहले की तुलना में बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।उनका कहना है कि पहले आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित संसाधन थे, लेकिन स्व-सहायता समूह से जुड़ने और विभिन्न गतिविधियां शुरू करने के बाद आय के नए रास्ते खुले हैं।
सरकारी योजनाओं से मिला अतिरिक्त सहयोग
बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। इन योजनाओं से परिवार को आर्थिक सहारा मिला और आगे बढ़ने का भरोसा मजबूत हुआ।बबली का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं को योजनाओं का लाभ लेने के साथ अपने कौशल और मेहनत का सही उपयोग करना चाहिए। स्व-सहायता समूह के जरिए मिलने वाला सहयोग महिलाओं को छोटे व्यवसाय और आयवर्धक गतिविधियां शुरू करने का अवसर दे सकता है।
मेहनत और अवसर के मेल से बदली तस्वीर
बबली यादव अपनी प्रगति का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान, स्व-सहायता समूह और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले सहयोग को देती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सही अवसर, सामूहिक सहयोग और निरंतर प्रयास से ग्रामीण महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं।आज बबली यादव केवल अपने परिवार की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण बन रही हैं। उनकी पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रयासों की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है।