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2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर चार्ज की चर्चा के बीच अशनीर ग्रोवर का बड़ा बयान, बोले- छोटे दुकानदारों पर असर पड़ा तो डिजिटल पेमेंट को झटका लगेगा

 नई दिल्ली: UPI पेमेंट को लेकर सामने आए नए नियमों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था और उसके संभावित असर को लेकर बहस छेड़ दी है। इसी बीच BharatPe के पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने UPI पर संभावित शुल्क को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। एक टीवी डिबेट में उन्होंने कहा कि UPI जैसी व्यवस्था को सरल और कम लागत वाली बनाए रखना जरूरी है।

₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क को लेकर चर्चा

14 सितंबर को जारी नियमों के बाद ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा तेज हुई। वहीं ₹2,000 तक के UPI लेन-देन पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं होने की बात कही गई।इसी मुद्दे पर Times Now Navbharat की एक डिबेट में अशनीर ग्रोवर से UPI शुल्क व्यवस्था को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने इस प्रस्तावित बदलाव की आलोचना करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान के लिए शुल्क की व्यवस्था बनाने से इसके इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।

अशनीर ने छोटे और बड़े भुगतान का उदाहरण देकर उठाया सवाल

अशनीर ग्रोवर ने अपनी बात समझाने के लिए अलग-अलग रकम के डिजिटल भुगतान का उदाहरण दिया। उनका तर्क था कि ₹1,000 किसी दोस्त को भेजने, ₹1 लाख ट्रांसफर करने या QR कोड के जरिए ₹3,000 का भुगतान करने में डिजिटल सिस्टम की संचालन लागत में बुनियादी अंतर नहीं होता।उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक तरह के भुगतान पर शुल्क नहीं है और छोटे कारोबारियों से जुड़े दूसरे भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है, तो इस अंतर का आधार क्या होगा।

UPI को सरल बनाए रखने की जरूरत बताई

ग्रोवर ने कहा कि UPI ने भारत में डिजिटल पेमेंट को बड़े स्तर पर आसान बनाया है और देश की भुगतान व्यवस्था को वैश्विक पहचान दिलाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में ऐसी लागत नहीं जोड़ी जानी चाहिए जिससे छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान महंगा हो जाए।

छोटे कारोबारियों पर असर को लेकर जताई चिंता

ग्रोवर ने यह भी आशंका जताई कि यदि QR कोड के जरिए भुगतान लेने वाले छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और अन्य कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत आती है, तो कुछ लोग दोबारा नकद लेन-देन की ओर लौट सकते हैं।उनके बयान के बाद UPI की शुल्क व्यवस्था को लेकर एक बार फिर यह बहस सामने आ गई है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ कारोबारियों और ग्राहकों पर किसी भी संभावित अतिरिक्त लागत का असर किस तरह पड़ेगा।