रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर देश, प्रदेश में शोक की लहर है। राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत अन्य नेताओं ने गहरा दुख जताया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन एक बड़ी क्षति है। ‘नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जैसी चर्चित कृतियों से साधारण जीवन को गरिमा देने वाले विनोद जी छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप में हमेशा हम सबके हृदय में विद्यमान रहेंगे। संवेदनाओं से परिपूर्ण उनकी रचनाएं पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनके परिजन एवं पाठकों-प्रशंसकों को हार्दिक संवेदना।
अपनी कालजयी रचनाओं से शुक्ल जी ने हमारी साहित्यिक धरोहर को किया समृद्ध : रमन सिंह
विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. रमन सिंह ने कहा, हृदय स्तब्ध है और यह स्वीकार करना बड़ा कठिन है कि विनोद कुमार शुक्ल जी अब हमारे बीच नहीं रहे। सुप्रसिद्ध साहित्यकार, ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल के निधन समाचार से मन को गहरी पीड़ा पहुंची है। विनोद जी का जाना केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं से हमारी साहित्यिक धरोहर को समृद्ध किया था। ईश्वर से प्रार्थना है कि शुक्ल जी को बैकुंठ धाम में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों व उनके अनगिनत प्रशंसकों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करें।
विनोद कुमार का जाना देशभर के लिए अपूरणीय साहित्यिक क्षति : भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर, ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित, हम सबके गौरव विनोद कुमार शुक्ल का जाना छत्तीसगढ़ सहित देशभर के लिए अपूरणीय साहित्यिक क्षति है। उन्होंने रायपुर के AIIMS अस्पताल में आज शाम 4 बजकर 58 मिनट पर अंतिम सांस ली है। मैं ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करता हूं। ईश्वर उनके परिवारजनों, उनके शुभचिंतकों एवं चाहने वालों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे। मैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अनुरोध करता हूं कि स्व. विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर तत्काल राजकीय शोक घोषित करें। प्रदेश में इस दौरान किसी भी प्रकार के उत्सव, महोत्सव को कुछ दिनों के लिए टाल दें। यह हम सबका साझा दुःख है।
शुक्ल की अनूठी लेखन शैली ने हिंदी साहित्य को दी नई दृष्टि : टीएस सिंहदेव
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा, ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत, छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनकी सरल, मानवीय और अनूठी लेखन शैली ने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और संवेदना दी। साहित्य के माध्यम से उन्होंने आम जीवन की गहराइयों को शब्द दिए। उनका जाना हिंदी साहित्य और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों व साहित्य जगत को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।
महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन एक बड़ी क्षति है। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी चर्चित कृतियों से साधारण जीवन को गरिमा देने वाले विनोद जी छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप में हमेशा हम सबके हृदय में विद्यमान रहेंगे।
संवेदनाओं से परिपूर्ण उनकी रचनाएँ पीढ़ियों… pic.twitter.com/47mFIzFYBc
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) December 23, 2025
हृदय स्तब्ध है और यह स्वीकार करना बड़ा कठिन है कि विनोद कुमार शुक्ल जी अब हमारे बीच नहीं रहे…
सुप्रसिद्ध साहित्यकार, ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित श्री विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन समाचार से मन को गहरी पीड़ा पहुँची है। विनोद जी का जाना केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि संपूर्ण… pic.twitter.com/aLe6iujWYE
— Dr Raman Singh (@drramansingh) December 23, 2025
छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर, ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित, हम सबके गौरव श्री विनोद कुमार शुक्ल जी का जाना छत्तीसगढ़ सहित देश भर के लिए अपूरणीय साहित्यिक क्षति है. उन्होंने रायपुर के AIIMS अस्पताल में आज 04:58PM पर अंतिम साँस ली है.
मैं ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति की… pic.twitter.com/8JhPg7DJ6h
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) December 23, 2025
ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत, छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
उनकी सरल, मानवीय और अनूठी लेखन शैली ने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और संवेदना दी। साहित्य के माध्यम से उन्होंने आम जीवन की गहराइयों को शब्द दिए।
उनका जाना हिंदी… pic.twitter.com/CSdQOzn0ya
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) December 23, 2025
ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत, छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
उनकी सरल, मानवीय और अनूठी लेखन शैली ने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और संवेदना दी। साहित्य के माध्यम से उन्होंने आम जीवन की गहराइयों को शब्द दिए।
उनका जाना हिंदी… pic.twitter.com/CSdQOzn0ya
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) December 23, 2025










