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7 साल पहले SGB में लगाया था पैसा तो आज हो गया करीब 4 गुना, 1 लाख के निवेश पर मिला 2.95 लाख का फायदा

Gold Demand

अगर आपने साल 2019 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB में पैसा लगाया था, तो आपके लिए रिटर्न से जुड़ी यह जानकारी खास हो सकती है। 17 सितंबर 2019 को जारी SGB सीरीज के प्री-मैच्योर रिडेम्पशन के लिए 17 सितंबर 2026 को कीमत 15,173 रुपए प्रति यूनिट तय की गई है। यानी करीब सात साल पहले इस बॉन्ड में निवेश करने वालों को सोने की कीमत में हुई बढ़ोतरी का सीधा लाभ मिला है।

3,840 रुपए से बढ़कर 15,173 रुपए हुई कीमत

सितंबर 2019 में ऑनलाइन माध्यम से खरीदे गए इस सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का इश्यू प्राइस 3,840 रुपए प्रति ग्राम था। अब प्री-मैच्योर रिडेम्पशन कीमत 15,173 रुपए प्रति ग्राम तय होने से प्रति ग्राम 11,333 रुपए का अंतर बनता है।

इश्यू प्राइस के मुकाबले देखें तो यह करीब 295 फीसदी की बढ़त है। हालांकि, इस गणना में SGB पर मिलने वाला ब्याज शामिल नहीं है। सरकार सामान्य तौर पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर 2.50 फीसदी सालाना की निश्चित ब्याज दर देती है।

1 लाख रुपए लगाने वाले निवेशक की रकम कितनी हुई

मान लीजिए किसी निवेशक ने सितंबर 2019 में इस SGB में 1 लाख रुपए लगाए थे। मौजूदा रिडेम्पशन कीमत के आधार पर उस निवेश की वैल्यू करीब 3.95 लाख रुपए बैठती है। यानी केवल बॉन्ड की कीमत में बढ़ोतरी के हिसाब से करीब 2.95 लाख रुपए का इजाफा हुआ।

इस हिसाब में मिलने वाला निर्धारित ब्याज अलग है। इसलिए वास्तविक कुल रिटर्न की गणना करते समय ब्याज को भी ध्यान में रखना होगा।

समय से पहले पैसा निकालने पर कीमत कैसे तय होती है

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की प्री-मैच्योर निकासी के समय भुगतान की कीमत सोने के बाजार मूल्य से जुड़ी होती है। RBI के नियमों के तहत पात्र अवधि पूरी होने पर निवेशक बॉन्ड को रिडीम कर सकते हैं। इस वजह से सोने की कीमत में बढ़ोतरी का असर SGB के रिडेम्पशन मूल्य पर भी दिखाई देता है।

SGB में निवेश की खासियत क्या है

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला गोल्ड आधारित निवेश साधन है, जिसका संचालन RBI करता है। इसमें निवेशक को भौतिक सोना खरीदकर रखने की जरूरत नहीं होती। बॉन्ड की यूनिट सोने के ग्राम के आधार पर तय होती है।

इस निवेश में दो तरह से रिटर्न की संभावना रहती है। पहला, सोने की कीमत बढ़ने पर बॉन्ड की वैल्यू में इजाफा हो सकता है। दूसरा, निवेशक को निर्धारित दर के अनुसार ब्याज भी मिलता है। यही वजह है कि SGB को फिजिकल गोल्ड के वैकल्पिक निवेश माध्यम के तौर पर देखा जाता है।