जगदलपुर। भाभी के बार-बार मायके जाने से नाराज होकर उन पर जानलेवा हमला करने वाले देवर को अदालत ने दोषी करार दिया है। करीब डेढ़ साल चली सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय, जगदलपुर ने नीलू मंडावी को भाभी जयमनी मंडावी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, बड़े भाई बोंडूक मंडावी पर जानलेवा हमला करने के मामले में उसे 7 साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। दोनों मामलों में अदालत ने 100-100 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मायके जाने की बात पर हुआ था विवाद
मामला परपा थाना क्षेत्र के बड़े बोदल गांव का है। घटना करीब डेढ़ साल पहले रात करीब 8 बजे की बताई गई है। अभियोजन के मुताबिक नीलू मंडावी लोहे की रॉड और हथौड़ा लेकर अपने बड़े भाई के घर पहुंचा था। वह अपनी भाभी जयमनी मंडावी के बार-बार मायके जाने से नाराज था।इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और आरोपी ने जयमनी पर रॉड और हथौड़े से हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।
पत्नी को बचाने पहुंचे भाई पर भी हमला
जयमनी को बचाने के लिए उनके पति बोंडूक मंडावी बीच में आए तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। बोंडूक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। वहीं, जयमनी की हालत गंभीर होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
डेढ़ साल तक चली अदालत में सुनवाई
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के आधार पर न्यायालय में चालान पेश किया। मामले में बीएनएस की धारा 103(1) और 109 के तहत कार्रवाई की गई। करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाह और अन्य साक्ष्य पेश किए।
हत्या के लिए उम्रकैद, भाई पर हमले में 7 साल की सजा
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने नीलू मंडावी को जयमनी मंडावी की हत्या और बोंडूक मंडावी पर जानलेवा हमला करने का दोषी माना। पीठासीन अधिकारी गोविंद नारायण जांगड़े ने हत्या के मामले में उम्रकैद और बोंडूक पर हमले के मामले में 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों मामलों में 100-100 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।