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सरगुजा में सरकारी जमीन पर बुलडोजर कार्रवाई, 30 बड़े अतिक्रमण ढहाए, 200 लोगों को नोटिस

 सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बांकी डैम की नहर और उससे लगी शासकीय जमीन पर कथित अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर पिछले तीन दिनों से बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं। अब तक 30 बड़े अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि करीब 200 कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।आरोप है कि सरकारी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग कर भूखंड बेचे गए और वहां एक से लेकर सात मंजिल तक की इमारतें खड़ी कर दी गईं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई जारी रहेगी।

11 किलोमीटर लंबी नहर की जमीन पर कब्जे का आरोप

जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर शहर की पेयजल जरूरतों से जुड़ी बांकी डैम की करीब 11 किलोमीटर लंबी नहर ग्राम सोहगा तक जाती है। आरोप है कि वर्ष 2016 से भूमाफियाओं और प्रभावशाली लोगों ने नहर की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा करना शुरू किया।नहर की मुख्य जमीन करीब 36 मीटर चौड़ी बताई गई है। आरोप है कि इसके एक हिस्से पर अतिक्रमण कर लिया गया। वहीं, करीब 16 मीटर चौड़ी सब-माइनर नहर को भी कब्जे के कारण घटाकर लगभग चार मीटर की नाली तक सीमित कर दिया गया। सरकारी भूमि पर प्लॉटिंग कर भूखंड बेचने और पक्के मकान बनाने के मामले भी सामने आए हैं।

जेसीबी से हटाए गए मकान और बहुमंजिला इमारतें

कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व विभाग ने पहले जमीन का सीमांकन कराया। इसके बाद 13 अक्टूबर से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया गया। कार्रवाई में करीब आधा दर्जन जेसीबी मशीनों और 40 कर्मचारियों की टीम को लगाया गया।मंगलवार और बुधवार को करीब एक किलोमीटर के दायरे में बने 23 मकानों से अतिक्रमण हटाया गया। गुरुवार को पांच मंजिला बताई जा रही सात इमारतों पर भी बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन के मुताबिक, अब तक कुल 30 बड़े अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर विरोध और हंगामे की स्थिति भी बनी। हालांकि, पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान जारी रखा गया।

200 कब्जाधारियों को नोटिस, आगे भी जारी रहेगा अभियान

नहर की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने करीब 200 लोगों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त कराने तक कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी।प्रशासन की इस मुहिम के बाद नहर की जमीन पर कथित रूप से कब्जा कर निर्माण करने वालों में हलचल है। आगे की कार्रवाई नोटिस और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

इस मामले में अंबिकापुर के सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम की शिकायत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने बांकी डैम की सब-माइनर नहर की जमीन से कब्जे हटाने और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने की मांग करते हुए कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन दिया था। शिकायत के साथ जमीन से संबंधित दस्तावेज भी सौंपे गए थे।शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने संबंधित अधिकारियों को सीमांकन के निर्देश दिए। सीमांकन के बाद अतिक्रमण की स्थिति सामने आने पर कार्रवाई शुरू की गई।

2021 में भी जल संसाधन विभाग से शिकायत का दावा

भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि नहर की जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया कई वर्षों से चल रही थी। उनके अनुसार, वर्ष 2016 से अतिक्रमण बढ़ने लगा था और वर्ष 2021 में जल संसाधन विभाग को इस संबंध में लिखित शिकायत दी गई थी।आलोक दुबे का दावा है कि वर्ष 2021 से 2026 के बीच जल संसाधन विभाग के दो कार्यपालन अभियंताओं ने अतिक्रमण हटाने के लिए एसडीएम और तहसीलदार को कई बार पत्र लिखे। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और सरकारी जमीन पर निर्माण बढ़ते गए।

नहर में पानी नहीं आने से खाली जमीन पर बढ़ा कब्जा

बांकी डैम का पानी वर्तमान में सिंचाई के बजाय अंबिकापुर शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। डैम से पानी तकिया प्लांट तक पहुंचाया जाता है, जहां से शहर में सप्लाई होती है। लंबे समय से नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण आसपास की जमीन खाली दिखाई देने लगी थी।आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर जमीन पर कब्जे किए गए। हालांकि, नहर में पानी का प्रवाह नहीं होने के बावजूद उसकी जमीन जल संसाधन विभाग की शासकीय भूमि ही है।

एसडीएम बोले- सीमांकन के बाद नियमानुसार कार्रवाई

एसडीएम बान सिंह नेताम के अनुसार, सीमांकन के दौरान करीब 36 मीटर चौड़ी नहर की जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई। कब्जाधारियों को नोटिस देने के बाद नियमानुसार निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है।उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस पूरे मामले ने शासकीय भूमि की निगरानी, नहरों की सुरक्षा और अतिक्रमण की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने को लेकर संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।