CG Chunav Update : अगर यहां घटी सीटे तो पार्टियों की होता है घाटा, हाथ से निकल जाती है सूबे की सत्ता, नेता यही ढूढ़ रहे हैं चाबी

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद अब तक के चुनावों में बस्तर संभाग में यही होता रहा है कि कांग्रेस या भाजपा जिसकी भी सीट घटी है, सत्ता उसके हाथ से निकल गई। 2018 में दंतेवाड़ा में उपचुनाव के बाद कांग्रेस के पास 12 सीटें आ गई थीं। बस्तर में कांग्रेस की कमान अब तक राहुल गांधी, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव संभाले हुए है पर पिछले चुनाव में बस्तर में शून्य हो चुकी भाजपा के भीतर सत्ता में वापसी की बैचनी सपष्ट दिखाई दे रही है। पिछले एक माह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह व अनुराग सिंह ठाकुर यहां सभा ले चुके हैं। सात नवंबर को यहां चुनाव होना है और अगले चार दिनों में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह का बस्तर दौरा संभावित है।

इस बीच मंतातरण को मुद्दा बनाकर चुनाव में उतरी भाजपा यहां कई सीटों पर जीत को तय मानकर चल रही है। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस के अंदर गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी का असर विधानसभा टिकट वितरण के दौरान भी दिखा। कांग्रेस ने 12 में से पांच सीटों पर वर्तमान विधायकों की टिकट काटकर नए प्रत्याशी उतारे हैं तो भाजपा से पूर्व मंत्री केदार कश्यप, लता उसेंडी, महेश गागड़ा व विक्रम उसेंडी की परंपरागत सीटों को छोड़कर, आठ सीटों पर नए प्रत्याशी मैदान में है।

छह सीट पर भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर
मतदान के एक सप्ताह पहले बस्तर संभाग की जगदलपुर, चित्रकोट, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, व कांकेर सहित छह सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। जगदलपुर में भाजपा-कांग्रेस ने दो पूर्व महापौर जतीन जायसवाल व किरण देव को मैदान में उतारा है। राहुल गांधी व मुख्यमंत्री की बस्तर प्रवास पर की गई घोषणाओं किसानों की कर्जमाफी, स्कूल से लेकर पीजी तक की मुफ्त शिक्षा की घोषणाओं के बाद यहां समीकरण बदलते दिखते हैं।

बस्तर के इन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प
चित्रकोट सीट पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व सांसद दीपक बैज के विरुद्ध भाजपा ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनायक गोयल को मैदान में उतारा है। प्रदेश अध्यक्ष के लिए आसान सीट पर गुटबाजी से अब यहां कांटे की टक्कर है। कोंटा में छठवीं बार मंत्री कवासी लखमा कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे। उनके विरुद्ध भाजपा के सोयम मुक्का व सीपीआइ के मनीष कुंजाम हैं। यहां जीत-हार का अंतर हमेशा कम रहा है, इस बार भी यहां त्रिकोणीय मुकाबले से चुनाव रोचक हो गया है। बीजापुर सीट पर एक वर्ष में आधा दर्जन भाजपा नेताओं की हत्या नक्सलियों ने की है। यहां भाजपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री महेश गागड़ा व कांग्रेस के वर्तमान विधायक विक्रम उसेंडी तीसरी बार आमने-सामने होंगे।

दंतेवाड़ा, कांकेर में कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर
महेंद्र कर्मा की परंपरागत दंतेवाड़ा सीट पर बेटे छविंद्र कर्मा पहली बार चुनावी मैदान में हैं। विधायक देवती कर्मा ने उनके लिए सीट छोड़ी है। कर्मा परिवार का समर्थन छविंद्र के पक्ष में दिखता है। भाजपा ने जिलाध्यक्ष चैतराम अटामी को टिकट दी है, जो क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं। कांकेर में विधायक शिशुपाल सोरी की टिकट काटकर पूर्व विधायक शंकर ध्रुवा को उतारा गया है। भाजपा से जनपद सदस्य आशाराम नेताम मैदान में है। यहां नरहरपुर क्षेत्र के मतदाता चुनावी समीकरण तय करेंगे।

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