Chhattisgarh : नेता प्रतिपक्ष का सीएम भूपेश को पत्र, लिखा- असमय आंधी-बरसात से रबी की फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजा दिया जाए

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Chhattisgarh : नेता प्रतिपक्ष का सीएम भूपेश को पत्र, लिखा- असमय आंधी-बरसात से रबी की फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजा दिया जाए
Chhattisgarh : नेता प्रतिपक्ष का सीएम भूपेश को पत्र, लिखा- असमय आंधी-बरसात से रबी की फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजा दिया जाए

Chhattisgarh : बेमौसम बारिश से फसलों का बहुत नुकसान हुआ। इसे लेकर आज बीजेपी नेता व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए उन्होंने कहा कि असमय आंधी और बरसात के कारण प्रदेश की रबी फसल बर्बाद हो गई है। इतना ही नहीं, फल और सब्जी की फसल को भी बहुत नुकसान हुआ है। इससे छत्तीसगढ़ के किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कराकर इससे प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाना चाहिए ।

Chhattisgarh : नेता प्रतिपक्ष का सीएम भूपेश को पत्र
Chhattisgarh : नेता प्रतिपक्ष का सीएम भूपेश को पत्र

Chhattisgarh : प्रदेश सरकार ने अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया

दूसरी ओर भाजपा के किसान नेता संदीप शर्मा ने भी कहा है कि गर्मी के समय बेमौसम बारिश से रवि फसल को बहुत नुकसान हुआ है ऐसे में कई किसान बर्बादी की हालत में पहुंच गए हैं । प्रदेश सरकार ने अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। किसान नेता संदीप शर्मा ने बताया कि प्रशासनिक अफसर किसानों को लेकर कुछ भी काम नहीं कर रहे हैं। पटवारी को बुलाकर रिपोर्ट तैयार कराने, फसलों की क्षति का आंकलन कराने और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के आपदा पीड़ित किसानों के लिए पर्याप्त मुआवजे की घोषणा करने की सबसे ज्यादा जरूरत है।

Chhattisgarh : सब्जियों को भी बहुत नुकसान

दरअसल, रायपुर के अभनपुर, समेत छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के अन्य जिलों से फसलों के खराब होने की खबरें आ रही हैं। दरअसल, अप्रैल और मई के महीने में हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को बड़ा झटका लगा है। अब किसानों को समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के निसदा गांव के रहने वाले किसान ज्यादातर सब्जी और धान की खेती करते हैं। यहां टमाटर बारिश की वजह से खराब हो गए। खेतों में बेमौसम बरसात की वजह से पानी भर गया और फसल चौपट हो गई। सड़े-गले टमाटरों को अब किसान फेंक रहे हैं। कच्चे फसल के पौधे टूट गए, झड़ गए। अब इनकी लागत कैसे निकलेगी इसकी भी चिंता इन्हे सता रही है।

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