रायपुर। छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर में 1 से 3 नवंबर तक राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिन चलने वाले इस समारोह में प्रदेश की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और आधुनिक संगीत की विविध झलक देखने को मिलेगी। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया समारोह का शुभारंभ करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।इस बार राज्योत्सव में बॉलीवुड के लोकप्रिय गायकों के साथ छत्तीसगढ़ के कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। पहले दिन पलक मुच्छाल, दूसरे दिन स्वास्ति मेहुल और अंतिम दिन अभिजीत भट्टाचार्य की संगीतमय प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी।
मुख्य मंच पर तीनों दिन खास कार्यक्रम
राज्योत्सव के पहले दिन 1 नवंबर को मुख्य मंच पर शाम 5 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू होगा। शाम 5 से 6 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार लोकसंगीत पेश करेंगे। शाम 6 बजे रायपुर के अनुराग शर्मा की प्रस्तुति होगी। इसके बाद शाम 6:30 से रात 8 बजे तक उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। रात 8 बजे से पार्श्व गायिका पलक मुच्छाल अपने गीतों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी।2 नवंबर को शाम 6 से 7 बजे तक मैं अयोध्या हूं नाट्य प्रस्तुति होगी। इसके बाद शाम 7 बजे रायपुर के कलाकार सुनील सोनी मंच संभालेंगे। रात 8 बजे से गायिका स्वास्ति मेहुल की संगीतमय प्रस्तुति होगी।समारोह के अंतिम दिन 3 नवंबर को शाम 6 से 6:30 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार लोकसंगीत पेश करेंगे। शाम 6:30 बजे पद्मश्री उषा बारले पंथी नृत्य की प्रस्तुति देंगी। शाम 7 से रात 9 बजे तक राज्य अलंकरण समारोह होगा। इसके बाद रात 9 बजे से गायक अभिजीत भट्टाचार्य अपने लोकप्रिय गीतों के साथ कार्यक्रम का समापन करेंगे।
शिल्पग्राम में भी सजेगा लोककलाओं का मंच
मुख्य मंच के अलावा शिल्पग्राम में भी तीनों दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। यहां स्थानीय और प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कलाकार लोकसंगीत, नृत्य, नाटक और अन्य विधाओं का प्रदर्शन करेंगे।1 नवंबर को शिल्पग्राम में नौ प्रस्तुतियां रखी गई है। रायपुर के शिवेन्द्र मंडावी लोकसंगीत और गिटार वादन करेंगे। राजीव श्रीवास्तव का रिदम बैंड और संतोष कुमार सिन्हा का फ्यूजन बैंड भी प्रस्तुति देंगे। दुर्ग के चेतन देवांगन और रायपुर की दुर्गा साहू पंडवानी गायन करेंगे। अनुष्का सुल्ताना शास्त्रीय नृत्य पेश करेंगी। इसके अलावा दुर्ग की रजनी रजक लोकमंच एवं ढोलामारू, बिलासपुर की वंदिता साहू लोकसंगीत और पायल साहू लोकमंच की प्रस्तुति देंगी।
दूसरे दिन 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
2 नवंबर को शिल्पग्राम में कुल 11 कार्यक्रम होंगे। प्रसन्ना अवस्थी लोकसंगीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगी। सुष्मिता दास ओडिसी नृत्य करेंगी, जबकि दुर्ग की समप्रिया पूजा निषाद पंडवानी गाथा सुनाएंगी। बिलासपुर के अंकित निर्मलकर सूफी, गजल और सुगम संगीत पेश करेंगे।गरियाबंद की मिलवंतीन बाई सुआ नृत्य करेंगी। रायपुर की मेघा बोस ताम्रकार पारंपरिक लोकसंगीत और आंचल पाण्डेय कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। धमतरी की रुखमनी दीवान लोकमंच पर प्रस्तुति देंगी। इसके साथ आदित्य मिश्रा बैंड, विनीता त्रिपाठी का कथक नृत्य और तेजराम साहू का लोकमंच कार्यक्रम भी शामिल रहेगा।
अंतिम दिन पंथी नृत्य, भजन और नाटक का आयोजन
3 नवंबर को शिल्पग्राम में दस प्रस्तुतियां होंगी। रायपुर की आस्था भट्ट भजन गायन करेंगी। दुर्ग की आरती बारले और रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े पंथी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। कबीरधाम के राकेश सेन लोकमंच और पूर्णिमा साहू जसगीत एवं जगराता भजन पेश करेंगी।अभिषेक सोनकर आदिवासी लोकसंगीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगे। दीपाली पाण्डेय कथक समूह नृत्य, वृद्धुमन वचस्पति भारती सूफी संगीत और अनुष्णा रॉय चौधरी कथक नृत्य पेश करेंगी। आनंदकुमार पाण्डेय की नाट्य प्रस्तुति के साथ शिल्पग्राम के कार्यक्रमों का समापन होगा।
लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
राज्योत्सव में पंडवानी, पंथी, सुआ, लोकगीत, आदिवासी नृत्य और शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाओं को प्रमुखता दी गई है। इनके जरिए प्रदेश की लोकआस्था, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को मंच पर उतारा जाएगा।तीन दिन का यह आयोजन स्थानीय कलाकारों के लिए अपनी कला और हुनर दिखाने का अवसर बनेगा। वहीं दर्शकों को एक ही परिसर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विधाओं से लेकर आधुनिक संगीत तक की प्रस्तुतियां देखने और सुनने का मौका मिलेगा।












