माता कौशल्या महोत्सव: इमली लाटा के स्वाद के दीवाने हुए सीएम भूपेश बघेल और कैलाश खेर, कार्यक्रम का हुआ समापन

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माता कौशल्या महोत्सव: भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी में कौशल्या माता महोत्सव का समापन हो गया है. 3 दिन चले आयोजन के अंतिम दिन देश के मशहूर सिंगर कैलाश खेर ने अपनी आवाज के जादू से समा बांध दिया. इस दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. महोत्सव के दूसरे दिन मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति हुई थी.

जानिए सिंगर कैलाश खेर को इमली लाटा का स्वाद कैसा लगा…

कौशल्या माता मंदिर के परिसर में राज्य की महिला समूहों की प्रदर्शनी लगाई गई थी. इसके अलावा बाहर से आए लोगों के लिए विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी खान पान के लिए भी एक स्टॉल लगाई गई थी. इसमें महिला चिला, फरा, गुलगुला भजिया जैसे व्यंजन की बिक्री हो रही है. इसी स्टॉल पर सोमवार शाम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सिंगर कैलाश खेर पहुंचे. दोनों ने छत्तीसगढ़ी इमली लाटा और व्यंजनों का स्वाद भी लिया. मुख्यमंत्री ने इमली लाटा के स्वाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि बहुत अच्छा टेस्ट है. बचपन के दिनों की याद आ गई. मुख्यमंत्री ने खेर को बताया कि हमारे यहां इमली लाटा, बेर के पाउडर से बनी रोटी और गटागट बहुत लोकप्रिय हैं.

कौशल्या धाम को भगवान राम के ननिहाल के रूप में पहचान मिली..

इस महोत्सव को लेकर कैलाश खेर ने कहा कि चंदखुरी के कौशल्या धाम को मुख्यमंत्री के प्रयासों से वैश्विक पहचान मिली है. उन्होंने माता कौशल्या मंदिर को भव्य रूप देने और महोत्सव के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की पहल और प्रयासों से विश्व स्तर पर कौशल्या धाम को भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में पहचान मिली है. छत्तीसगढ़ की धरा और लोग धन्य हैं, जिन्हें माता कौशल्या और भगवान राम दोनों का आशीर्वाद एक साथ मिल रहा है.

माता कौशल्या महोत्सव: भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी में कौशल्या माता महोत्सव का समापन हो गया है. 3 दिन चले आयोजन के अंतिम दिन देश के मशहूर सिंगर कैलाश खेर ने अपनी आवाज के जादू से समा बांध दिया. इस दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. महोत्सव के दूसरे दिन मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति हुई थी.


सिंगर कैलाश खेर ने इमली लाटा का लिया स्वाद…


कौशल्या माता मंदिर के परिसर में राज्य की महिला समूहों की प्रदर्शनी लगाई गई थी. इसके अलावा बाहर से आए लोगों के लिए विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी खान पान के लिए भी एक स्टॉल लगाई गई थी. इसमें महिला चिला, फरा, गुलगुला भजिया जैसे व्यंजन की बिक्री हो रही है. इसी स्टॉल पर सोमवार शाम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सिंगर कैलाश खेर पहुंचे. दोनों ने छत्तीसगढ़ी इमली लाटा और व्यंजनों का स्वाद भी लिया. मुख्यमंत्री ने इमली लाटा के स्वाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि बहुत अच्छा टेस्ट है. बचपन के दिनों की याद आ गई. मुख्यमंत्री ने खेर को बताया कि हमारे यहां इमली लाटा, बेर के पाउडर से बनी रोटी और गटागट बहुत लोकप्रिय हैं.

 

कौशल्या धाम को भगवान राम के ननिहाल के रूप में मिली पहचान

इस महोत्सव को लेकर कैलाश खेर ने कहा कि चंदखुरी के कौशल्या धाम को मुख्यमंत्री के प्रयासों से वैश्विक पहचान मिली है. उन्होंने माता कौशल्या मंदिर को भव्य रूप देने और महोत्सव के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की पहल और प्रयासों से विश्व स्तर पर कौशल्या धाम को भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में पहचान मिली है. छत्तीसगढ़ की धरा और लोग धन्य हैं, जिन्हें माता कौशल्या और भगवान राम दोनों का आशीर्वाद एक साथ मिल रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा- श्रीराम हमारे भांजे हैं…

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि श्रीराम हमारे भांजे हैं, हमारे राम शबरी के राम है, माता कौशल्या के राम हैं, वनवासियों के राम हैं, हमारे पवित्र ग्रंथों में श्रीराम की जैसी छबि बनती है, हमारे राम वैसे हैं. हमें संत महात्माओं का अनुकरण करते भगवान श्रीराम को वैसे ही चित्रित कर हमेशा उनके आदर्शों पर चलते हुए महात्मा गांधी के दिखाएं राम राज्य के आदर्श के लिए काम करते रहना है.इसके आगे उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है और वे हमारे भांजे हैं, इसलिए हमारे प्रदेश में परंपरा रही है कि हम अपने भांजों का चरण स्पर्श करते हैं.

भारत का सबसे दुर्लभ मंदिर है…

गौरतलब है कि देश का इकलौता कौशल्या माता मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में है. शहर से 27 किलोमीटर दूर चंदखुरी माता कौशल्या धाम है. जहां 126 तालाबों वाले इस गांव में जलसेन तालाब के बीच में माता कौशल्या का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है. जो पूरे भारत में सिर्फ यहीं पर है. प्रभु श्रीराम को गोद में लिए हुए माता कौशल्या की प्रतिमा को दुर्लभ माना जाता है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि श्रीराम हमारे भांजे हैं, हमारे राम शबरी के राम है, माता कौशल्या के राम हैं, वनवासियों के राम हैं, हमारे पवित्र ग्रंथों में श्रीराम की जैसी छबि बनती है, हमारे राम वैसे हैं. हमें संत महात्माओं का अनुकरण करते भगवान श्रीराम को वैसे ही चित्रित कर हमेशा उनके आदर्शों पर चलते हुए महात्मा गांधी के दिखाएं राम राज्य के आदर्श के लिए काम करते रहना है.इसके आगे उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है और वे हमारे भांजे हैं, इसलिए हमारे प्रदेश में परंपरा रही है कि हम अपने भांजों का चरण स्पर्श करते हैं.

 

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