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नशीली दवाओं के कारोबार पर हाईकोर्ट का सख्त रुख…दूसरी जमानत याचिका खारिज, डिजिटल लेनदेन को माना अहम सबूत

 बिलासपुर : नशीली दवाओं की अवैध तस्करी से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ प्रत्यक्ष बरामदगी ही नहीं, बल्कि संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी गंभीर साक्ष्य माना जाएगा।यह मामला Ambikapur में दर्ज एक बड़े ड्रग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच के दौरान कई डिजिटल और वित्तीय सुराग सामने आए थे।

यूपीआई ट्रांजैक्शन बना केस का अहम मोड़, 25 हजार रुपये का लेनदेन सवालों के घेरे में

जांच में सामने आया कि आरोपी ने यूपीआई के जरिए अपने एक सह आरोपी के बैंक खाते में 25 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि यह लेनदेन केवल व्यक्तिगत मदद नहीं था, बल्कि नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को आर्थिक रूप से समर्थन देने का हिस्सा था।इस डिजिटल ट्रांजैक्शन को अदालत ने प्रथम दृष्टया गंभीर माना और कहा कि ऐसे वित्तीय संबंध अपराध की श्रृंखला को मजबूत करते हैं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत जमानत पर सख्ती, कोर्ट ने दिए अहम संकेत

मामला NDPS Act के तहत दर्ज है, जिसमें जमानत को लेकर कानून बेहद कठोर प्रावधान लागू होते हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक विशेष परिस्थितियां स्पष्ट रूप से साबित न हों, तब तक ऐसे मामलों में राहत देना उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी की पहली जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी थी और नए तथ्य भी सामने नहीं आए, इसलिए दूसरी याचिका स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।

जांच में भारी मात्रा में नशीली दवाओं की बरामदगी

पुलिस जांच के दौरान कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप की 108 बोतलें और बुप्रेनॉर्फिन इंजेक्शन के 100 से अधिक डोज बरामद किए गए। यह बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि नेटवर्क काफी संगठित और व्यापक था।

बचाव पक्ष का दावा और अदालत की सख्त टिप्पणी

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का किसी भी तरह की प्रतिबंधित सामग्री से सीधा संबंध नहीं है और यूपीआई ट्रांजैक्शन केवल मानवीय सहायता के रूप में किया गया था। लेकिन सरकारी पक्ष ने इसे खारिज करते हुए कहा कि डिजिटल लेनदेन भी इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

कोर्ट का बड़ा संदेश: सिर्फ तस्करी नहीं, आर्थिक सहयोग भी अपराध

हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में केवल सीधे शामिल होना ही नहीं, बल्कि उसे आर्थिक सहायता देना भी गंभीर अपराध माना जाएगा। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं।

ड्रग नेटवर्क मामलों में डिजिटल सबूतों की बढ़ती अहमियत

यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए मिसाल माना जा रहा है, जहां डिजिटल पेमेंट, यूपीआई ट्रांजैक्शन और बैंकिंग रिकॉर्ड को मजबूत सबूत के रूप में देखा जा सकता है।