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चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने के लिए नया रॉकेट बनाएगा इसरो, डिजाइन हो रही तैयार…

बेंगलूरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने के लिए एक नया प्रक्षेपणयान (रॉकेट) विकसित करेगा। इस रॉकेट की क्षमता 75 से 80 टन पे-लोड (उपग्रह) को पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित करने की होगी। यह परियोजना अभी डिजाइन और संरचना निर्माण के चरण में है।

यहां गुरुवार को इसरो अध्यक्ष वी.एन. नारायणन ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की है। इस मिशन के लिए एक नए रॉकेट की आवश्यकता होगी, जो अंतरिक्षयात्रियों को ले जाने वाले क्रू मॉड्यूल को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करे। फिलहाल हम अगली पीढ़ी के प्रक्षेपणयान (एनजीएलवी) का विकास कर रहे हैं, जिसकी प्रक्षेपण क्षमता लगभग 30 टन (एलईओ) होगी।

केंद्र सरकार ने एनजीएलवी परियोजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने के लिए हमें उससे भी अधिक ताकतवर रॉकेट की जरूरत है, जिसकी प्रक्षेपण क्षमता 75 से 80 टन होगी। इस नए रॉकेट की डिजाइनिंग का काम हो रहा है, उसके बाद संरचना तैयार होगी। उन्होंने कहा कि यह कई चरणों वाला रॉकेट होगा।

निजी क्षेत्र की अहम भूमिका: राजाराजन

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक ए. राजाराजन ने बताया कि फिलहाल इस रॉकेट को लूनर मॉड्यूल लॉन्च व्हीकल (एलएमएलवी) कहा जा रहा है। रॉकेट की डिजाइन और संरचना तैयार होने के बाद उसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस नए रॉकेट का विकास अगले दो दशक की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। ऐसे तकनीकों का प्रयोग होगा, जो दो-तीन दशक बाद भी सार्थक होंगे। इसका विकास और निर्माण निजी उद्योग के सहयोग से किया जाएगा। राजाराजन ने बताया कि चंद्रमा पर पहले मानव रहित मिशन भेजा जाएगा और उसके लिए एनजीएलवी का प्रयोग होगा। मानव मिशन एलएमएलवी से लांच किया जाएगा।