कई राज्यों तक फैला था कारोबार
जांच के अनुसार यह नेटवर्क रायगढ़ के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन परिक्षेत्रों से लकड़ियां जुटाने के बाद उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने का काम करता था। पुलिस के मुताबिक लकड़ियों को पहले गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में जमा किया जाता था। इसके बाद उनकी छिलाई और अन्य प्रक्रिया के बाद ट्रांसपोर्टरों के जरिए हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भेजे जाने का आरोप है।अवैध कारोबार को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट तैयार किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
मई 2025 की कार्रवाई से खुला मामला
वन विभाग को मई 2025 में सूचना मिली थी कि जूटमिल थाना क्षेत्र के जामटीकरा, गढ़उमरिया में एक गोदाम किराये पर लेकर आसपास के वन क्षेत्रों से खैर और तेंदू की लकड़ियां जमा की जा रही हैं। सूचना के आधार पर 5 मई 2025 को वन विभाग की टीम ने गोदाम में छापा मारा।कार्रवाई के दौरान ट्रक क्रमांक CG 15 DV-7577 में तेंदू प्रजाति के 42 लट्ठे मिले, जिनकी मात्रा 1.731 घन मीटर बताई गई। इसके अलावा गोदाम से तेंदू और खैर प्रजाति के 146 लट्ठे, कुल 6.741 घन मीटर लकड़ी, जलाऊ लकड़ी के 9 चट्टे, एक कटर मशीन, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा जब्त किया गया।कार्रवाई के दौरान रोहित मित्तल और उसके सहयोगी मौके से फरार हो गए थे।
ट्रांसपोर्ट परमिट पर भी उठे सवाल
छापे के दौरान आरोपियों की ओर से लकड़ियों के परिवहन से जुड़े ट्रांसपोर्ट परमिट प्रस्तुत किए गए थे। वन विभाग की जांच में इन दस्तावेजों पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। प्रथम दृष्टया दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद वन विभाग ने इसे केवल अवैध लकड़ी भंडारण का मामला न मानकर संगठित अपराध की आशंका से जांच आगे बढ़ाई।इसके बाद 2 सितंबर 2026 को वन विभाग की ओर से जूटमिल थाने में विस्तृत जांच के लिए आवेदन दिया गया। पुलिस ने BNS की संबंधित धाराओं और भारतीय वन अधिनियम 1927 की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया।
पुलिस ने बनाई विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने जांच के दौरान आरोपियों की भूमिका और आपसी कनेक्शन की जानकारी जुटाई।प्रारंभिक जांच के मुताबिक रोहित मित्तल ने गढ़उमरिया में गोदाम किराये पर लिया था। आरोप है कि वहां वन क्षेत्रों से कटवाई गई लकड़ियों को जमा किया जाता था और मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर आगे की प्रक्रिया कराई जाती थी। इसके बाद भरत मेश्राम और सलाउद्दीन खान के जरिए लकड़ियों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने की बात सामने आई।पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ और जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
इन तीन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
- रोहित मित्तल, निवासी अग्रसेन कॉलोनी, विकास नगर, कोतरा रोड, रायगढ़
- मनीष अग्रवाल, निवासी मुड़पार, बलौदाबाजार
- सलाउद्दीन खान, निवासी सरसींवा, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़
मामले में भरत कुमार मेश्राम फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
इतनी सामग्री हुई जब्त
वन विभाग की कार्रवाई में ट्रक से 42 नग तेंदू लट्ठे, 1.731 घन मीटर लकड़ी, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा बरामद किया गया। गोदाम से तेंदू और खैर के 146 लट्ठे, 6.741 घन मीटर लकड़ी, जलाऊ लकड़ी के 9 चट्टे और एक कटर मशीन जब्त की गई है।