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मानवता की मिसाल बना अंगदान और देहदान को बढ़ावा देने वाला प्रोजेक्ट दधीचि, राज्यपाल ने रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और दानदाताओं को किया सम्मानित

रायपुर। जिला प्रशासन रायपुर द्वारा संचालित अभिनव पहल ‘प्रोजेक्ट दधीचि’ को अंगदान और देहदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मान मिला है। राज्यपाल रमेन डेका ने इस परियोजना के सफल संचालन और समाज में जनजागरूकता फैलाने के लिए रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही परियोजना के तहत अंगदान और देहदान करने वाले दानदाताओं का भी सम्मान किया गया।

 

अंगदान को बताया महादान

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि अंगदान महादान है। इसके माध्यम से न केवल किसी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि शारीरिक अंगों की कमी से जूझ रहे लोगों को नया जीवन और नई उम्मीद भी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुण्य कार्य में सहभागी बन सकें।

 

चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए उपयोगी है देहदान

राज्यपाल ने देहदान के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी होता है। मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को समझने में सहायता मिलती है, वहीं शोध कार्यों को भी नई दिशा मिलती है।

 

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शुरू हुआ प्रोजेक्ट

गौरतलब है कि प्रोजेक्ट दधीचि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशन में संचालित एक महत्वपूर्ण नवाचार है। इस परियोजना का उद्देश्य आम नागरिकों को अंगदान और देहदान के लिए प्रेरित करना तथा दानदाताओं और उनके परिवारों का सम्मान कर समाज में सकारात्मक संदेश देना है।

 

86 लोगों ने लिया अंगदान और देहदान का संकल्प

जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट दधीचि के तहत अब तक 86 लोगों ने अंगदान एवं देहदान के लिए संकल्प लिया है। इनमें 65 लोगों ने पूर्ण देहदान और 21 लोगों ने अंगदान का संकल्प लेकर मानवता की सेवा में योगदान दिया है।

 

समाज में जागरूकता का बन रहा माध्यम

प्रोजेक्ट दधीचि की सफलता यह दर्शाती है कि जनजागरूकता, प्रशासनिक पहल और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से अंगदान एवं देहदान जैसे संवेदनशील विषयों पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह पहल न केवल जरूरतमंदों के लिए जीवनदान का माध्यम बन रही है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।