आंखें नम, दिल में गम… जब अपने ‘अनमोल रतन’ को विदाई देने आए रतन टाटा के छोटे भाई

मुंबई: वे बड़े खुशनुमा दिन थे. हमारे दरम्यान कोई नहीं था… रतन टाटा ने इन लाइनों के साथ साल 1945…

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