कभी “रामू काका” जरूरी हिस्सा होते थे हमारी हिंदी फिल्मों का, अब ऐसे कैरेक्टर नदारद

बदलते परिवेश में अब ऐसे चरित्र रचे नहीं जा रहे हिंदी फिल्मों में मुंबई। उनके कंधे पर लटका हुआ गमछा…

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