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शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर सरकार का विशेष जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले दो वर्षों के दौरान शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों और उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है। नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभागीय सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने विभाग की प्रमुख योजनाओं, भर्ती, पदोन्नति, स्कूलों की व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।

मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का फोकस स्कूल शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक आधारित और विद्यार्थी केंद्रित बनाने पर है। पिछले दो वर्षों में शिक्षकों की कमी दूर करने से लेकर नई शिक्षा नीति लागू करने, स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई और AI आधारित मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर काम किया गया है।

स्कूलों के युक्तियुक्तकरण से शिक्षकों की उपलब्धता सुधारने की कोशिश

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया। इस प्रक्रिया में 15,165 शिक्षकों और प्राचार्यों को जरूरत के अनुसार विभिन्न स्कूलों में पदस्थ किया गया।

सरकार के अनुसार 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई, जबकि 4,729 एकल शिक्षकीय स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए।

पदोन्नति के मोर्चे पर भी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। टी संवर्ग में 1,335 और ई संवर्ग में 1,478 पदों पर प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। इसके अलावा टी संवर्ग के 1,798 व्याख्याताओं को पदोन्नति मिली। पिछले दो वर्षों में विभिन्न पदों पर 7 हजार से अधिक पदोन्नतियां की गईं।

शिक्षक भर्ती को मिली रफ्तार, 5 हजार पदों की प्रक्रिया जारी

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के लिए 848 स्पेशल एजुकेटर पदों को स्वीकृति दी गई है। वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्तियां की गईं। पिछले दो वर्षों के दौरान कुल 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की जा चुकी है।

सरकार ने बताया कि 5 हजार शिक्षकीय पदों के लिए भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया जारी है। वहीं स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में 3 हजार से अधिक संविदा पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी चल रही है।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा से संविदा भर्ती में पारदर्शिता पर जोर

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय और अन्य सरकारी संस्थानों में शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक संविदा पदों के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा की व्यवस्था शुरू की गई है।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में 1,895 और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में 1,171 पदों समेत कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया चल रही है। विभाग का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली से भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और कम समय में परिणाम जारी करने में मदद मिलेगी।

नई शिक्षा नीति के साथ पाठ्यक्रम में भी बदलाव

प्रदेश में 15 जुलाई 2024 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया गया। शुरुआती कक्षाओं की शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए कक्षा 1 और 2 की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया है।

कक्षा 1 और 2 के लिए 16 स्थानीय और 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार की गई हैं। वहीं कक्षा 1, 2, 3 और 6 के विषयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों का स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अनुकूलन किया गया है। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त वाचन सामग्री भी तैयार की गई है।

स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई को मिला बढ़ावा

शिक्षा मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ भाषा चित्रण करने वाला देश का पहला राज्य है। बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा के माध्यम से बेहतर ढंग से पढ़ाने के उद्देश्य से बस्तर संभाग में 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।

कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी भाषा के अनुरूप पाठ्यपुस्तकें तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।

ऑनलाइन उपस्थिति और डिजिटल सिस्टम से बढ़ी निगरानी

स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक और टीके एप के जरिए उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है। विभाग के अनुसार प्रतिदिन लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है।

अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस प्रक्रिया और ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाओं के जरिए प्रशासनिक कामकाज को भी डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

45 लाख से अधिक विद्यार्थियों को समय पर मिलीं किताबें

शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इससे 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थियों को लाभ मिला।

पाठ्यपुस्तकों के वितरण और सत्यापन के लिए स्कैनिंग प्रणाली लागू की गई है। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 16 बोलियों में भी किताबें प्रकाशित करने की पहल की गई।

निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना से 1 लाख 62 हजार 827 छात्राएं लाभान्वित हुईं। वहीं कक्षा 1 से 8 तक के 28 लाख 63 हजार 786 विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया।

10वीं और 12वीं के परिणाम में करीब 2 प्रतिशत की बढ़त

विभाग के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में लगभग 2 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया।

परीक्षा से पहले विषयवार समीक्षा, प्रश्नपत्रों के ब्लूप्रिंट, बेहतर अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठकों और केंद्रीकृत परीक्षाओं के जरिए परिणाम सुधारने पर विशेष ध्यान दिया गया।

शनिवार को बैग से राहत, खेल और रचनात्मक गतिविधियों पर फोकस

विद्यार्थियों को पढ़ाई के दबाव से कुछ राहत देने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए शनिवार को बैग रहित दिवस के रूप में गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

इस दिन खेल, योग, व्यायाम, स्थानीय कला और संस्कृति, महापुरुषों के जीवन, तीज त्योहार और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी गतिविधियां कराई जाती हैं। भाषण, निबंध, गीत, कहानी और लोककथाओं के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।

स्कूल भवनों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर बड़ा फोकस

पिछले तीन वर्षों में 504 नए विद्यालयों को स्वीकृति दी गई है। वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन स्कूलों के लिए नए भवनों का प्रावधान किया गया है।

वर्ष 2023 से 2026 के बीच 2,583 नए अतिरिक्त कक्षों को मंजूरी दी गई। स्कूलों में शौचालय निर्माण और मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, जबकि 302 शौचालयों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए 100 करोड़

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण और संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार की योजना प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक ऐसा विद्यालय विकसित करने की है, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।

बस्तर और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर जोर

नियत नेल्ला नार योजना के तहत बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई। द्विभाषीय शिक्षा सामग्री के उपयोग के लिए बस्तर संभाग में 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।

शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय स्कूलों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा 48 बंद स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया और 36 नए विद्यालय खोले गए।

AI आधारित विद्या समीक्षा केंद्र से होगी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी

शिक्षा विभाग ने तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाते हुए AI आधारित विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित किया है। इसके जरिए स्कूलों की अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।

कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों और अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है। विभाग के अनुसार पाठ्यपुस्तक वितरण में बारकोड आधारित ट्रैकिंग लागू करने से शासन को करीब 40 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

पीवीटीजी बच्चों के लिए आवासीय सुविधा का विस्तार

प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के लिए स्कूलों के नजदीक आवासीय छात्रावास विकसित किए जा रहे हैं।

प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में 33 हजार से अधिक बच्चे सुविधा का लाभ ले रहे हैं। 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत भी जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्कूल अधोसंरचना और छात्रावास सुविधाओं को मजबूत करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए 13 जिलों में 42 छात्रावासों को मंजूरी दी गई है।

गुणवत्ता, तकनीक और समान अवसर पर विभाग की नई दिशा

स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने दो वर्षों के कामकाज को शिक्षकों की उपलब्धता, पारदर्शी भर्ती, डिजिटल प्रशासन, आधुनिक अधोसंरचना, स्थानीय भाषाओं में शिक्षा और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्कूलों की पहुंच से जोड़कर प्रस्तुत किया है।

सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भी शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए तकनीक, बेहतर संसाधन और विद्यार्थी केंद्रित योजनाओं पर काम जारी रहेगा, ताकि प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर पहुंच सके।