नई दिल्ली। दिवाली से पहले शुक्रवार को देश के आकाश में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए ने गर्वीली उड़ान भरी। हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नासिक स्थित एयरक्राफ्ट मैन्यूफैक्चरिंग डिविजन में भरी इस उड़ान के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने तेजस मार्क 1ए की तीसरी और एचटीटी-40 ट्रेनर विमान की दूसरी प्रोडक्शन लाइन का भी उद्घाटन किया। एचएलएल के इस प्लांट में सुखोई शृंखला के विमानों को असेम्बल किया जाता रहा है। यहां मिग-21 भी बने हैं। इस दौरान राजनाथ सिंह ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहले हम जो कुछ बाहर से खरीदते थे, आज वही चीजें देश में बना रहे हैं।
फाइटर एयरक्राफ्ट, मिसाइल, इंजन, इलेक्ट्रिक वेलफेयर सिस्टम इन सभी क्षेत्रों में भारत ने जबरदस्त प्रगति की है। हमारी एयरोस्पेस इंडस्ट्री भी तेजी से ग्रोथ कर रही है। मेक इन इंडिया तहत स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने एयरोस्पेस उपकरणों के उत्पादन की पहल की है। उन्होंने कहा कि यह उड़ान, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उड़ान है। गौरतलब है कि तेजस मार्क 1ए 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इसमें 64 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
सेना को 83 तेजस की होगी आपूर्ति
भारतीय वायुसेना को अगले चार साल में 83 तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की जाएगी। हालांकि अमरीकी इंजन की आपूर्ति में देरी के कारण इसके निर्माण में देरी हो रही है। नासिक स्थित एचएएल की मैन्यूफैक्चरिंग डिविजन में हर साल आठ लड़ाकू विमानों का निर्माण करने की क्षमता है। वहीं, नासिक के अलावा बेंगलूरु में भी तेजस की दो प्रोडक्शन लाइन हैं। यहां पर हर साल 16 लड़ाकू विमान बनाए जाते हैं। अब एचएएल की उत्पादन क्षमता बढ़कर 24 विमान प्रति साल हो जाएगी।








