2019 में मदद के लिए दिए गए थे 5 लाख रुपये
न्यायालय में दर्ज मामले के अनुसार, यदुनंदन नगर निवासी रितेश अग्रवाल ने वर्ष 2019 में अपने परिचित संतोष मानिकपुरी की सहायता के लिए 5 लाख रुपये दिए थे। संतोष मानिकपुरी जमीन और मकान के कारोबार से जुड़े बताए गए हैं।रितेश अग्रवाल के अनुसार, करीब छह महीने बाद जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें लगातार कुछ समय बाद भुगतान करने की बात कहकर टाला जाता रहा।
रकम लौटाने के लिए दिया गया चेक बैंक में हुआ बाउंस
काफी आग्रह के बाद मंजूषा मानिकपुरी के बैंक खाते से 5 लाख रुपये का चेक दिया गया। रितेश अग्रवाल ने जब यह चेक बैंक में जमा किया तो वह अनादरित होकर वापस आ गया।चेक बाउंस होने की जानकारी उन्होंने फोन के जरिए संतोष मानिकपुरी को दी। इसके बाद दोबारा चेक बैंक में लगाने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता ने जब दूसरी बार भी चेक प्रस्तुत किया तो वह भी बाउंस हो गया।
2020 में शुरू हुई न्यायिक कार्रवाई
लगातार दो बार चेक बाउंस होने के बाद रितेश अग्रवाल ने वर्ष 2020 में न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से परिवादी के दावे पर सवाल उठाए गए और उसे मामले में जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया गया।हालांकि सुनवाई के दौरान न्यायालय के सामने पेश किए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मंजूषा मानिकपुरी को दोषी माना गया।
कोर्ट ने चेक की रकम के दोगुने प्रतिकर के साथ सुनाई सजा
मामले में न्यायालय ने मंजूषा मानिकपुरी को दोषी ठहराते हुए 5 लाख रुपये के चेक की राशि के दोगुने के बराबर प्रतिकर राशि देने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्हें एक महीने के साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई।फैसला सुनाए जाने के बाद न्यायालय के आदेश के अनुसार उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया गया।