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नाना पाटेकर ने राजनीति से क्यों बनाई दूरी, किस नेता को मानते थे चाणक्य?

Nana Patekar Death:  बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद उनके फिल्मी सफर के साथ उनकी निजी सोच और सामाजिक जीवन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नाना पाटेकर ने फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन राजनीति में उतरने से हमेशा दूरी बनाए रखी। खास बात यह है कि उन्हें सक्रिय राजनीति में आने के प्रस्ताव भी मिले थे।

2014 में मिला था चुनाव लड़ने का प्रस्ताव

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नाना पाटेकर का नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में आया था। उस समय खबरें सामने आई थीं कि बीजेपी ने उन्हें मुंबई की एक लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने के लिए संपर्क किया था।

हालांकि नाना पाटेकर ने राजनीति में आने का रास्ता नहीं चुना। 2014 के चुनाव में मुंबई उत्तर मध्य सीट से आखिरकार बीजेपी ने प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने चुनाव जीतकर लोकसभा में प्रवेश किया।

राजनीति को लेकर क्या सोचते थे नाना

नाना पाटेकर सार्वजनिक जीवन में अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते थे। वह कई मौकों पर राजनीति और नेताओं पर अपनी बात रखते रहे, लेकिन खुद किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने से बचते रहे।

उनसे जुड़े राजनीतिक बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर कई बार विवाद भी हुआ। एक चर्चित बयान को उनके नाम से वायरल किया गया था, लेकिन नाना पाटेकर ने खुद उस बयान से साफ इनकार किया था। फैक्ट चेक में भी उस कथित बयान को फर्जी पाया गया।

राजनीति में दोस्त कौन थे?

नाना पाटेकर की कई राजनीतिक हस्तियों से मुलाकात और दोस्ती रही, लेकिन उन्हें किसी एक राजनीतिक दल के सक्रिय नेता के तौर पर देखना सही नहीं होगा। उनका सार्वजनिक जीवन मुख्य रूप से सिनेमा और सामाजिक कार्यों से जुड़ा रहा।

उनकी राजनीतिक दिलचस्पी जरूर दिखाई देती थी, लेकिन उन्होंने चुनावी राजनीति को अपने करियर का हिस्सा नहीं बनाया। यही वजह है कि 2014 में चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बावजूद उन्होंने खुद को राजनीति से दूर रखा।

किसे मानते थे राजनीति का चाणक्य?

नाना पाटेकर के बारे में यह दावा कई जगह मिलता है कि वह किसी खास नेता को राजनीति का चाणक्य मानते थे, लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए विश्वसनीय स्रोत में स्पष्ट और प्रत्यक्ष बयान मिलना जरूरी है। इसलिए इस हिस्से को बिना ठोस प्रमाण के तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

इतना जरूर है कि नाना पाटेकर राजनीति पर अपनी राय रखने से कभी पीछे नहीं हटे, लेकिन उन्होंने अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान को ही प्राथमिकता दी। उनके लिए राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बजाय अपने तरीके से सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाना ज्यादा महत्वपूर्ण रहा।