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घर पर इंटरनेट कवरेज नहीं था तो जाना होता था छत पर, अभावों के बीच मिल गई मंजिल

बीआईटी दुर्ग में यूपीएससी टॉपर ने अनुभव साझा किए,कहा-सोशल मीडिया से दूर रहे और मौलिक मटेरियल से करें पढ़ाई

रायपुर। यूपीएससी (UPSC) में चयन के लिए जगह की बाधा नहीं होती। रायपुर से पढ़कर भी सलेक्शन होता है। बिना कोचिंग के भी सलेक्शन होता है। हिंदी मीडियम से भी सलेक्शन होता है और इसके लिए जरूरी नहीं कि सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं से आपने पढ़ाई की हो।

बीआईटी दुर्ग (BIT-Durg) में शुक्रवार 10 जून को आयोजित कार्यक्रम में पांच टॉपर्स जुटे और सब अलग-अलग एजुकेशन फील्ड थे, सबने कहा कि अपने पसंद का सबजेक्ट चुनो और खूब पढ़ो।
रायपुर से टॉपर श्रद्धा शुक्ला (Shraddha Shukla) ने कहा कि उन्होंने कोचिंग नहीं ली और मौलिक मटेरियल पढ़ा। रायपुर से ही पढ़ाई भी की। पूजा (Puja) ने बताया कि वो मगरलोड से हैं घर में इंटरनेट का कवरेज ही नहीं।

इंटरनेट चाहिए तो ऊपर छत पर जाना पड़ता है। फिर भी चयन में इसके लिए कोई बाधा नहीं आई। पूजा ने बताया कि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया तो सबसे ज्यादा बाधक है। पढ़ाई के लिए और तीन साल तक सोशल मीडिया से दूर रहीं।

उन्होंने कहा कि पहले दो अटेम्प खराब हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। निगेटिव लोगों से दूर रही। पाजिटिविटी आपके अंदर है इसके लिए मसूरी जाकर मोटिवेशन नहीं लेना पड़ता, ऐसा मोटिवेशन टिकता नहीं है।

अभिषेक अग्रवाल (Abhishek Agrawal) ने कहा कि कोई जॉब के साथ भी पढ़ाई कर सकता है। मैंने भी जॉब में रहते हुए पढ़ाई की इसलिए समय मैनेज करना पड़ा। अक्षय पिल्लै (Akshay Pillay) ने कहा कि इंजीनियरिंग के सब्जेक्ट लेकर भी चयनित हुआ जा सकता है।

कोई भी विषय हो, उसमें आपकी पकड़ मायने रखती है। दिव्यांजलि ने कहा कि यूपीएससी की तैयारी मैराथन दौड़ के जैसी है। इसमें सही रणनीति रखना बहुत जरूरी है।

बीआईटी दुर्ग के कार्यक्रम की झलकियां

कार्यशाला में कलेक्टर दुर्ग डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे (Durg Collector Dr. Sarveshwar Narendra Bhure) ने भी अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि जिस तरह साढ़े तीन घंटे आप लोग लगातार धैर्य से आज टॉपर्स को सुन रहे हैं। कुछ वर्षों पहले मैंने भी ऐसे ही एक कार्यशाला अटेंड की थी, जिसमें खड़े होकर साढ़े तीन घंटे टापर्स को सुना था।

जहां आपके इंटेलीजेंस की सीमा होती है वहां से हार्डवर्क काम करना शुरू कर देता है।
पुलिस अधीक्षक दुर्ग डॉ. अभिषेक पल्लव (SP Durg Dr. Abhishek Pallav) ने भी अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने कहा कि हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है।

स्मार्ट वर्क की शुरूआत भी हार्ड वर्क से हुए अनुभवों से होती है। कोई यूपीएससी की तैयारी करें तो उसे पूरी तौर पर समर्पित होकर तैयारी करनी होगी। जब तक पूरे संकल्प से अपनी शक्ति इसमें झोंक नहीं देंगे, तब तक सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन सही रणनीति से यदि कड़ी मेहनत की जाए तो सफलता तय है।