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जल-थल-नभ में बढ़ी भारत की ताकत, आईएनएस विक्रांत देश को समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के

हाथों हुआ लोकार्पण

कोच्चि। भारत ने थल और नभ के साथ ही अब जल में भी दुश्मनों को तबाह करने का यह सबसे खतरनाक युद्धपोत मैदान में उतार दिया है।

दुनिया के सबसे खतरनाक माने जाने वाले युद्धपोतों में शामिल पूर्ण स्वदेशी आइएनएस विक्रांत Fully indigenous INS Vikrant को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Prime Minister Narendra Modi ने 2 सितंबर शुक्रवार को भारतीय नौसेना Indian Navy को समर्पित किया।

भारत के इस महा विध्वंशकारी आइएनस विक्रांत का दूसरा नाम इंडीजीनियस एअरक्राफ्ट कैरियर (आइएसी) भी है।

भारत की हुंकार है विक्रांत : मोदी

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, विक्रांत विशाल है, विराट है, विहंगम है। विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष भी है। विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है बल्कि ये विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है जिसे दुनिया देख रही है। मोदी ने कहा ये 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

नौसेना को मिला नया ध्वज

नौसेना का नया ध्वज

नौसेना के नए ध्वज को सौंपते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘आज 2 सितंबर, 2022 की ऐतिहासिक तारीख को, इतिहास बदलने वाला एक और काम हुआ है। आज भारत ने, गुलामी के एक निशान, गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया है। आज से भारतीय नौसेना को एक नया ध्वज मिला है।

तैरता हुआ एयरफ़ील्ड

यह युद्धपोत से ज़्यादा तैरता हुआ एयरफ़ील्ड है, यह तैरता हुआ शहर है। इसमें जितनी बिजली पैदा होती है उससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है। इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फ़ील्ड से बड़ा है। इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं वह कोचीन से काशी तक पहुंच सकते हैं।

क्यों दिया गया आइएनएस विक्रांत नाम

यह दुनिया का सबसे बड़ा व खतरनाक सातवां विमानवाहक पोत है। भारत के पहले विमानवाहक पोत का नाम भी आइएनएस विक्रांत-11 था। उसी की याद में इसे आइएनएस विक्रांत नाम दिया गया है।

आईएनएस विक्रांत से जुड़ी खास बातें

20 हजार करोड़ की लागत

262.5 मीटर लंबा और 62.5 मीटर चौड़ा

42 हजार 800 टन डिस्प्लेसमेंट एरिया

18 फ्लोर में 2400 कक्ष

1600 क्रू मेंबर्स की व्यवस्था

18 मिग 29के कई विमान की तैनाती

12 एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर तैनात

2.5 एकड़ में फैला

16 बेड का मिनी हॉस्पिटल, ऑपरेशन थिएटर

64 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन व डिजिटल एक्सरे

16 हजार रोटियां एक दिन में पकेंगी

4800 लोगों की क्षमता वाला किचन

3900 किलोमीटर तक रैंज

बराक मिसाइलों की तैनाती जल्द

बता दें कि विक्रांत के डेक से काफी संख्या में लड़ाकू विमान एक साथ टेकऑफ और लैंडिंग कर सकते हैं। आइएनएस पर सतह से हवा में मार करने वाली बराक मिसाइलें भी जल्द तैनात की जाएंगी। इससे पहले भारत के पास एक अन्य विमानवाहक पोत आएनएस विक्रमादित्य भी है।

इसमें इमरजेंसी व गैस टरबाइन सिस्टम भी है। इसमें आरएएन-401 थ्री डी एअर सर्विलांस सिस्टम है। सेल्फ प्रोटेक्शन के लिए कवच कॉफ डिकॉय सिस्टम और टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम है। इसमें एके-360 क्लोज वीपन सिस्टम और रिमोट कंट्रोल गन सुविधाएं हैं। बिना ईंधन भरे यह कोच्चि से ब्राजील तक की यात्रा कर सकता है।

बीएसपी प्रबंधन ने आईएनएस विक्रांत हेतु इस्पात निर्माण करने वाले विभागों को दी शाबासी

सम्मान समारोह में बीएसपी के अफसर

देश के पहले स्वदेशी रूप से निर्मित एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत हेतु स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) Steel Authority of India Limited (SAIL) की विभिन्न इकाइयों ने मिलकर 30,000 टन इस्पात की आपूर्ति की है, जिसमें से 17000 टन अकेले भिलाई स्टील प्लांट Bhilai Steel Plant ने प्रदान किया है।

इस स्वदेशी परियोजना के लिए सेल के विभिन्न संयंत्रों द्वारा आपूर्ति किए गए स्टील में विशेष डीएमआर ग्रेड प्लेट्स शामिल हैं जिसकी आपूर्ति प्रमुख रूप से भिलाई ने की है। इन डीएमआर ग्रेड प्लेट्स को सेल ने भारतीय नौसेना और डीएमआरएल के सहयोग से विकसित किया गया है। इस युद्धपोत के पतवार और पोत के अंदरूनी हिस्सों के लिए ग्रेड 249 ए और उड़ान डेक के लिए ग्रेड 249 बी की डीएमआर प्लेटों का उपयोग किया गया है। इसके उत्पादन व आपूर्ति में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शाॅप में इस्पात निर्माण से लेकर प्लेट मिल में इन प्लेटों की सफलतापूर्वक रोलिंग तथा इन डीएमआर प्लेटों के गुणात्मक विश्लेषण व आंकलन कर इसके क्वालिटी को सुनिश्चित करने वाले रिसर्च एवं कंट्रोल लेबोरेटरी जैसे प्रतिबद्ध विभागों के योगदान को रेखांकित करने हेतु शुक्रवार 2 सितम्बर को ईडी (वर्क्स) सभागार में समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता director-in-charge of Bhilai Steel Plant Anirban Dasgupta एवं कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) अंजनी कुमार Executive Director (Works) Anjani Kumar विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3 व क्वालिटी) एस के कर, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-2) एस के घोषाल, मुख्य महाप्रबंधक (प्लेट मिल) आर के बिसारे, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (आयरन) तापस दासगुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सेवाएं) पी के सरकार एवं अन्य उच्च अधिकारीगण एवं इस इस्पात को बनाने वाले कार्मिकगण भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर आईएनएस विक्रांत के लोकार्पण तथा निर्माण से जुड़ी दो लघु फिल्में प्रदर्शित की गई। इसके साथ ही आरसीएल के महाप्रबंधक आर सुधीर ने डीएमआर के निर्माण की चुनौतियों व इतिहास तथा भिलाई बिरादरी के प्रयासों को अपनी प्रस्तुति से सदन को रूबरू कराया।