समूचे छत्तीसगढ़ में दीपावली को लेकर उत्साह का माहौल, बाजारों में तिल भर को जगह नहीं
रायपुर। मुख्यमंत्री ने दीपावली की सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप आज धनतेरस पर अपने निवास पर धान की झालर बांधने की रस्म की पूरी की।
बघेल ने प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं प्रेषित की है। अपनी दीवाली की तैयारियों में मुख्यमंत्री बघेल शनिवार को रायपुर के गोल बाजार भी पहुंचे।
उल्लेखनीय है कि दीपावली के दौरान खेतों में जब नयी फसल पककर तैयार हो जाती है, तब ग्रामीण धान की नर्म बालियों से कलात्मक झालर तैयार करते हैं।
इनसे घरों की सजावट कर वे अपनी सुख और समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्हें पूजन के लिए आमंत्रित करते हैं।
ऐसा लोक विश्वास है कि उनका यह आमंत्रण उन चिड़ियों के माध्यम से देवी तक पहुंचता है, जो धान के दाने चुगने आंगन और द्वार पर उतरती हैं।
इस तरह प्रदेश की लोक-संस्कृति अपनी खुशियों को प्रकृति के साथ बांटती है और उसे सहेजती है।
छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर सरगुजा तक धान की झालर घर के आंगन और द्वार पर लटकाए जाने की परंपरा है। जिसे पहटा अथवा पिंजरा भी कहा जाता है।
दिवाली की ख़रीदी करने
गोलबाज़ार पहुँचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शनिवार की दीवाली की अपनी खरीदी करने गोल बाजार पहुंचे। यहां उनके साथ रायपुर महापौर एजाज ढेबर व अन्य कई लोग थे। बाजार पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने लौंग इलायची खिलाकर उनका स्वागत किया।
यहां मुख्यमंत्री बघेल ने स्थानीय कुम्हारों से दीये, मटकी और दुकान से दिवाली पूजन की सामग्री सहित मिष्ठान भंडार से दिवाली की मिठाई भी ख़रीदी की। उन्होंने बाजार की व्यवस्था को लेकर व्यापारियों से चर्चा भी की।










