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देश के मजबूत नेतृत्व का प्रतीक थीं इंदिरा गांधी

आज जयंती पर विशेष: इंदिरा ने देश को एकजुट

रखा और कांग्रेस पार्टी को भी मजबूत किया

 

कनक तिवारी

जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा प्रियदर्शिनी राजनीति में किसी की कृपा की मोहताज नहीं रहीं। पिता ने जेल से बेटी को शिक्षा देते पत्र लिखे। वे विश्व इतिहास की धरोहर हैं। अस्पतालों में तपेदिक से तप रही माता और जेल आ जा रहे पिता से अलग रहकर इंदिरा ने स्वतंत्रता सैनिकों की मदद के लिए वानर सेना का गठन भी किया था।

पिता उन्हे राजनीतिक उत्तराधिकार सौंपना भी चाहते रहे होंगे तो भी खुलकर ऐसे प्रयास नहीं किए। नेहरू के बाद इंदिरा के बदले कांग्रेस ने सर्वसम्मति से लालबहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया। शास्त्री के निधन के बाद लगभग डेढ़ वर्ष तक सूचना प्रसारण मंत्री रहते इंदिरा गांधी ने अपना राजनीतिक कद इतना बढ़ा लिया कि वरिष्ठ मोरारजी देसाई के मुकाबले उन्हें कांग्रेस ने प्रधानमंत्री चुन लिया।

इंदिरा गांधी के शुरुआती वर्ष असफलता के रहे। इसका मूल कारण कांग्रेस का आंतरिक गृह युद्ध रहा है। भारत की आजादी का श्रेय मिलने के बावजूद कांग्रेस वक्त के दबावों के चलते आर्थिक नजरिए से एक बूर्जुआ संगठन बन गई थी। व्यापारिक हितों के सूरमा प्रतिनिधि सिंडिकेट के नाम से नेतृत्व की मुश्कें कसने लगे। यह इंदिरा गांधी को गैरसमझौतावादी स्वभाव के कारण मंजूर नहीं हुआ। वे अकेली कांग्रेस नेता हुईं जिन्होंने कांग्रेस को ही तोड़ दिया। कार्यकर्ताओं के बहुमत ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

इंदिरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता की नब्ज टटोलने का नायाब नुस्खा था। उन्होंने एक साथ कई उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। शाही थैली और विशेषाधिकार खत्म किए। ‘गरीबी हटाओ‘ जैसा नारा राजनीति के बियाबान में उछाल दिया। इसके बावजूद बढ़ता इंदिरा विरोध अंततः कद्दावर नेता जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में परवान चढ़ा। अपने कमजोर क्षणों में घबराकर इंदिरा गांधी ने गलत सलाह पर आचरण करते देश पर आपातकाल थोप दिया। उसका खमियाजा उन्हें सत्ताच्युत होकर भोगना पड़ा।

 

इतिहास इंदिरा गांधी को बांग्लादेश बनवाने के कारण कभी नहीं भूलेगा। श्रीलंका के निकट अमेरिका का सातवां जंगी जहाजी नौसेना का बेड़ा खड़ा रहा जो पाकिस्तान की मदद के लिए था। आननफानन में फैसला करते इंदिरा गांधी ने सेनानायक मानेक शा को पूर्वी बंगाल फतह करने आदेश दिया।

इंदिरा गांधी के कटुतम आलोचक अटल बिहारी वाजपेयी तक ने इंदिरा गांधी को दुर्गा का अवतार कहा था। विश्व में कोई लोकतांत्रिक नेता नहीं हुआ है जो मरने के बाद अपनी पार्टी की झोली में अस्सी प्रतिशत सीटें विवादग्रस्तता के बावजूद डाल गया हो।

https://twitter.com/Mayur9x/status/1593860566547922944

इंदिरा गांधी के आर्थिक चिंतन को उनकी उत्तराधिकारिणी बहू और दौहित्र की अगुआई में मनमोहन सिंह जैसे विश्व बैंक और रिजर्व बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी के कारण गुमनामी के अंधेरों में कांग्रेस ने ठेल दिया। इंदिरा गांधी के आर्थिक सोच में उत्तराधिकारियों ने विदेशी दीमकें क्यों उगा दीं।

इंदिरा गांधी और 1967 का भारत चीन युद्ध

पीयुष बबेले

राजाओं के ताज छीनने वाली, गरीबों को अधिकार देने वाली, पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाली, सिक्किम का भारत में विलय कराने वाली और भारत को अखंड रखने के लिए खुद को शहीद करने वाली श्रीमती इंदिरा गांधी का आज जन्मदिवस है। ऐसे में याद करें कि कैसे इंदिरा जी ने चीन को सबक सिखाया था।

 

हम लोग अक्सर 1962 के भारत-चीन युद्ध की चर्चा करते हैं। और उसमें झूठ सच मिलाकर नेहरू जी की आलोचना करते हैं। लेकिन 1967 में इंदिरा गांधी के जमाने में नाथू ला और चो ला दर्रों पर भारत और चीन के बीच हुए युद्ध की चर्चा नहीं करते। यह भारत और चीन के बीच दूसरा निर्णायक युद्ध था।

 

इस युद्ध में भारत ने 340 चीन के सैनिक मार गिराए थे और भारत के करीब 88 सैनिक शहीद हुए थे। भारत की सेना ने चीन को पीछे खदेड़ दिया था और उसके तमाम सैनिक ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इस युद्ध के बाद से करीब 50 साल तक चीन ने भारत की सरहद की तरफ आंख उठाकर नहीं देखा।

इंदिरा गांधी यहीं नहीं रुकी। तिब्बत पर चीन के कब्जे को लेकर हम अक्सर हीनता बोध से ग्रस्त हो जाते हैं। चीन को सबक सिखाने के लिए इंदिरा गांधी ने 1975 में उस जमाने में स्वतंत्र देश सिक्किम का भारत में विलय कराया था। इस तरह हिमालय की पहाड़ियों पर चीन और भारत के बीच एक संतुलन पैदा किया गया।

https://twitter.com/angrybirddtweet/status/1593792677551767552

 

इंदिरा गांधी ने चीन को जो सबक सिखाया था, वह अब जाकर मोदी जी के समय में खत्म हुआ है। जब चीन ने पिछले साल हमला करके हमारे 20 जवानों को शहीद कर दिया और बड़ी संख्या में भारतीय जवानों को बंदी बना लिया। बाद में चीन ने हमारे जवानों को छोड़ा। इन जवानों की शहादत का बदला आज तक नहीं लिया गया।